Rajiv Gandhi Death Anniversary: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ला की आंखों देखी दास्तां। जानिए 35 साल पहले 21 मई 1991 के उस मनहूस दिन और राजीव गांधी की अंतिम यात्रा का रोंगटे खड़े कर देने वाला पूरा सच।
Rajiv Gandhi Assassination Story: 35 साल पहले कि ऐसी घटना जिसको सोचकर आज भी सिरहन महसूस होती है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के आकस्मिक निधन से पूरा देश सहम गया था। जिस तरह मानव बम ने उनके चीथड़े किए थे, वो बहुत ही दर्दनाक था। राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर उनकी अंतिम यात्रा के गवाह रहे पत्रकार विवेक शुक्ला उस मनहूस दिन के बारे में कुछ यूं बता रहे हैं...
राजीव गांधी ने 20 मई, 1991 को राजधानी के निर्माण भवन में अपना लोकसभा चुनाव के लिए वोट डाला था। अब भी दिल्ली को वह तस्वीर याद है, जब कांग्रेस के उम्मीदवार राजेश खन्ना कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गांधी और सोनिया गांधी को उनका वोट डलवाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने अपना वोट डालने के बाद राजेश खन्ना को कहा था कि कैंपेन को और तेज कर दो। चुनाव जीतना है। यह बात राजेश खन्ना के सहयोगी और कांग्रेस के नेता सुनील नेगी बताते हैं। वे भी तब वहां पर ही थे। राजेश खन्ना नई दिल्ली सीट से भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी के खिलाफ उस चुनाव को लड़ रहे थे। वह राजधानी में राजीव गांधी का अंतिम कार्यक्रम था। उसे 21 मई, 1991 के सब अखबारों ने प्रमुखता से छापा था। तब तक खबरिया चैनलों को आने में कुछ वक्त और था। उसके अगले ही दिन यानी 21 मई, 1991 को उनकी तमिलनाडू के पेरंबदूर शहर में एक बम धमाके में मौत हो जाती है। जाहिर है, सारा देश राजीव गांधी की अकाल मौत से सन्न था।
यकीन नहीं होता कि राजीव गांधी को गुजरे हुए 35 साल बीत चुके हैं। उनकी अंत्येष्टि 24 मई 1991 को दिल्ली के वीर भूमि पर हुई। आज भी जब मैं उस दिन को याद करता हूं, तो आंखें नम हो जाती हैं।
वरिष्ठ पत्रकार शुक्ला बताते हैं कि उन दिनों वे राजधानी के बड़े अग्रेजी अखबार से जुड़े थे और तीन मूर्ति भवन में मौजूद थे, जहां राजीव जी का पार्थिव शरीर जनता के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। दुनिया भर से साठ से ज्यादा देशों के नेता और गणमान्य व्यक्ति दिल्ली पहुंचे थे।
पाकिस्तान से प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी कट्टर राजनीतिक विरोधी बेनजीर भुट्टो दोनों राजीव गांधी के अंतिम संस्कार में भाग लेने दिल्ली पहुंचे थे। दोनों हमवतन थे, लेकिन उस वक्त एक-दूसरे से पूरी तरह दूर-दूर रहे। नजरें तक नहीं मिलाईं। दोनों ने सोनिया गांधी और बच्चों से अलग-अलग मुलाकातें कीं। नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से बात भी की, लेकिन बेनजीर से उनकी कोई बातचीत नहीं हुई।
तीन मूर्ति से वीर भूमि तक की अंतिम यात्रा अविस्मरणीय थी। राजधानी की सड़कों पर लाखों गमगीन लोग खड़े थे। ये दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों से लोग पहुंचे थे। उस दिन भी दिल्ली में 41 डिग्री की भयंकर गर्मी थी, लेकिन किसी को परवाह नहीं थी। तीन मूर्ति से निकलकर मुख्य मार्गों, राजपथ और राजघाट के पास वीर भूमि पहुंची शवयात्रा। यही वो पावन भूमि है जहां उनके नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू, मां इंदिरा गांधी और भाई संजय गांधी की भी अंतिम यात्राएं निकली थीं। वीर भूमि यमुना किनारे बनी है।
वीर भूमि पर विदेशी मेहमानों के बैठने के लिए अलग व्यवस्था की गई थी। वहां भी नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो एक-दूसरे से दूर ही बैठे रहे। उस दौर में उनकी पार्टियां- मुस्लिम लीग (नवाज) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (बेनजीर) में दुश्मनी थी।वक्त ने करवट ली। बेनजीर भुट्टो 2007 में रावलपिंडी में बम हमले में शहीद हो गईं। ये अलग बात है कि आगे चलकर शरीफ और भुट्टो परिवार इमरान खान की सरकार गिराने में साथ आए। सियासी दुश्मनी को भुलाकर सत्ता साझा की। राजनीति का चक्र यही तो है।
अंत्येष्टि में यासर अराफात सबसे ज्यादा भावुक दिखे। PLO के चेयरमैन बार-बार फूट-फूटकर रो पड़ते थे। उनका गांधी परिवार से गहरा व्यक्तिगत नाता था। वे इंदिरा गांधी की अंत्येष्टि में भी आए थे।अन्य प्रमुख विदेशी मेहमानों में ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति नजीबुल्लाह, अमेरिकी उप-राष्ट्रपति डैन क्वेल और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री खालिदा जिया शामिल थे।
शाम सवा पांच बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अंत्येष्टि शुरू हुई। सोनिया गांधी काला चश्मा लगाए अपने २० वर्षीय बेटे राहुल को संभाल रही थीं। राहुल ने चिता की सात परिक्रमाएं कीं, फूल-चंदन-घी चढ़ाया और मुखाग्नि दी। प्रियंका भी वहां मौजूद थीं। पूरा मंजर दिल दहला देने वाला था। चिता डेढ़-दो घंटे तक जलती रही। गर्मी के बावजूद हजारों लोग वहां डटे रहे। गोल मार्केट के कांग्रेस कार्यकर्ता प्रीतम धारीवाल बताते हैं कि अंत्येष्टि के बाद वहां से निकलते हुए उनके और बहुत से लोगों की आंखों में आंसू थे।
शुक्ला कहतै हैं, मेरी नजर में राजीव गांधी की शवयात्रा महात्मा गांधी के बाद सबसे बड़ी थी। इंदिरा और संजय की यात्राओं में भी भारी भीड़ थी, लेकिन राजीव की यात्रा में सड़कें पूरी तरह ठसाठस भरी थीं। आकाशवाणी के प्रसिद्ध न्यूज रीडर मेलविल डिमेलो ने बापू की शव यात्रा की सात घंटे लंबी लगातार कमेंट्री की थी। वे बताते थे कि गांव-गांव से लोग घी लेकर आए थे, सैकड़ों ने सिर मुंडवाए थे। राजीव की यात्रा भी उतनी ही भावुक और यादगार थी।
राजीव गांधी और सोनिया गांधी का 25 फरवरी, 1968 को सफदरगंग रोड पर वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार विवाह संपन्न हुआ। सोनिया गांधी का परिवार गांधी परिवार के मित्र हरिवशंराय बच्चन के विलिंग्डन क्रिसेंट स्थित सरकारी आवास में ठहरा हुआ था। विवाह वाले दिन शाम को 1929 में बने हैदराबाद हाउस में एक रिस्पेशन का आयोजन किया गया। उस दिन हैदराबाद हाउस को फूलों से सजाया गया था। उस रिस्पेशन के कार्यक्रम में कोई तड़क भड़क नहीं थी। बता दें कि एडविन लुटियन द्वारा डिजाइन हैदराबाद हाउस निज़ाम हैदराबाद उस्मान अली खान ने बनवाया था। इसे 1947 के बाद भारत सरकार ने टेक ओवर कर लिया था। इसे आगे चलकर विदेश मंत्रालय ने ले लिया।
राजीव गांधी में किसी तरह का ऐटिटूड नहीं था कि वे देश के सबसे खास परिवारों में से एक से संबंध रखते हैं। वे 1980 से पहले बिलकुल किसी सामान्य इंसान की तरह से जिंदगी बिता रहे थे। वे अपनी पत्नी सोनिया गांधी के साथ अपनी फिएट या एंबेंसेडर कार में आइसक्रीम का आनंद लेने लगातार इंडिया गेट आया करते थे। दोनों पति-पत्नी आइसक्रीम लेने के बाद इंडिया गेट के आसपास कुछ पल सुकून से गुजारते। ये उन दिनों की बातें हैं जब दिल्ली या देश आतंकवाद से दो-चार नहीं हुआ था। अपने छोटे भाई संजय गांधी की 1980 विमान हादसे में मौत के बाद उनकी जिंदगी बदल गई। वे कांग्रेस संगठन में आ गए। फिर वे इंडिया गेट पर तो आइसक्रीम खाते हुए नजर नहीं आए। राजीव गांधी इंडिया गेट से सटे हैदराबाद हाउस से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए थे। राजीव और सोनिया गांधी की शादी 25 फरवरी 1968 को प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के 1 सफदरजंग रोड स्थित आवास में सम्पन्न हुई थी। उसके बाद शाम को रिसेप्शन आयोजित की गई हैदराबाद हाउस में। उस विवाह समारोह और फिर रिसेप्शन के कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन और अजिताभ बच्चन सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।
राजीव गांधी मॉडर्न स्कूल, बाराखंभा रोड में कई बार गए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मॉडर्न स्कूल में ही पढ़ते थे। वे स्कूल के प्रिंसिपल श्री एस.पी. बख्शी साहब से अपने बच्चों की प्रोग्रेस पूछते रहते थे। राहुल गांधी मॉडर्न स्कूल के शिवाजी हाउस में थे। वे एक बार छत्रपति महाराज पर तैयार नाटक का हिस्सा थे। राजीव गांधी उसे देखने के लिए सोनिया गांधी के साथ स्कूल आए थे। उन्होंने नाटक को बाकी पेरेंट्स के साथ देखा। वे नाटक के शुरू होने से पहले ही आ गए थे। जब उनके बच्चे हुमायूं रोड़ पर स्थित जूनियर मॉडर्न स्कूल में पढ़ते थे, वे वहां भी कई बार जाया करते थे। राजीव गांधी ने राजधानी में कुछ साल शिव निकेतन स्कूल में भी पढ़ाई की थी।