
'गाय को मिले राष्ट्रीय पशु का दर्जा'
Mob lynching over cow controversy: देश में गाय और गौकशी को लेकर अक्सर राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ती रहती है। इसी बीच, मुस्लिम संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने एक बड़ा बयान देकर इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि गाय को देश का राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाए। मदनी का कहना है कि जब देश की बड़ी आबादी गाय को मां मानती है और कई साधु-संत भी इसकी मांग कर रहे हैं, तो सरकार को कानून बनाने में देरी नहीं करनी चाहिए। इस फैसले से मुस्लिम समुदाय को कोई आपत्ति नहीं होगी, बल्कि समाज में शांति आएगी।
मौलाना मदनी ने कहा कि गाय के मुद्दे को जानबूझकर राजनीतिक और भावनात्मक रंग दिया गया है। कुछ लोग सिर्फ अफवाहें फैलाकर या पशु तस्करी के नाम पर बेकसूर लोगों को हिंसा का शिकार बना देते हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि लगातार झूठ फैलाकर मुसलमानों की छवि ऐसी बना दी गई है जैसे वे गाय के विरोधी हों। मदनी ने बताया कि पहले बहुत से मुस्लिम भाई गाय पालते थे और दूध का व्यापार करते थे, लेकिन साल 2014 के बाद बने डर और नफरत के माहौल की वजह से अब वे सुरक्षा के लिहाज से गाय की जगह भैंस पालना ज्यादा ठीक समझते हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि जमीयत हमेशा से मुसलमानों को यह सलाह देती आई है कि ऐसा कोई काम न करें जिससे दूसरे धर्म के लोगों की भावनाएं आहत हों। इस्लाम भी आपसी सम्मान के साथ रहने की शिक्षा देता है। संगठन हर साल ईद-उल-अजहा बकरीद के मौके पर अखबारों में विज्ञापन देकर अपील करता है कि जिन पशुओं पर पाबंदी है, उनकी कुर्बानी बिल्कुल न की जाए।
मौलाना मदनी ने देश में गाय को लेकर चल रहे दोहरे कानून पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समान नागरिक संहिता UCC के लिए 'एक देश, एक कानून' की बात होती है, तो गाय को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग कानून क्यों हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्वोत्तर और दक्षिण के कई राज्यों में जहां बीजेपी की सरकारें हैं, वहां खुलेआम गोमांस खाया जाता है। वहां एक केंद्रीय मंत्री भी बीफ खाने की बात स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन वहां हिंसा करने वाले लोग चुप रहते हैं। मदनी ने कहा कि वोटों की राजनीति के लिए गाय और 'मिथुन' जर्सी गाय में फर्क पैदा कर दिया गया है।
अंत में मौलाना मदनी ने कहा कि कुछ लोगों को गाय से आस्था नहीं, बल्कि सिर्फ राजनीति और वोट बैंक से प्यार है। चुनाव के समय ऐसे मुद्दों को जानबूझकर उछाला जाता है। इस पूरे विवाद और नफरत को खत्म करने का एकमात्र रास्ता यही है कि सरकार तुरंत गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे और इसके संरक्षण का कानून पूरे देश में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू करे।
Published on:
20 May 2026 05:58 pm
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