Doodh Soda Delh: फिल्म 'धुरंधर' की सफलता ने दिल्ली में 'दूध सोडा' के पुराने क्रेज को फिर से जिंदा कर दिया है। जानें मुखर्जी नगर और नांगिया पार्क की उन दुकानों के बारे में जो 1955 से परोस रही हैं यह देसी ड्रिंक।
New Delhi: फिल्मों का असर केवल कुछ घंटे या कुछ दिनों तक नहीं रहता है कि बल्कि, हमारे खान-पान की आदतों को भी बदल देता है। दरअसल, हाल ही में आई फिल्म 'धुरंधर' फिल्म सिनेमाघरों में तो धमाल मचा ही रही है इसके साथ ही उत्तर भारत के एक पुराने और पारंपरिक ड्रिंक 'दूध सोडा' को एक बार फिर से ट्रेंड में ला दिया है। फिल्म में गौरव गेरा के किरदार मोहम्मद आलम का डायलॉग 'डार्लिंग, डार्लिंग, दिल क्यों तोड़ा। पीलो पीलो, आलम सोडा' , इतना मशहूर हुआ कि लोगों में इस पेय को लेकर पुरानी यादें और जिज्ञासा ताजा हो गई है।
आपको बता दें कि दूध सोडा मुख्य रूप से ठंडे दूध और कार्बोनेटेड सोडा का मिश्रण है। इसमें चीनी और बर्फ मिलाई जाती है, और स्वाद बढ़ाने के लिए अक्सर गुलाब (Rose) या अन्य सिरप का उपयोग किया जाता है। उत्तर भारत की तपती गर्मियों में यह एक हल्का, झागदार और ताजगी देने वाला ड्रिंक माना जाता है।
दिल्ली में दशकों पुराने दो ऐसे ठिकाने हैं जो 1950 और 60 के दशक से दूध सोडा परोस रहे हैं। फिल्म की लोकप्रियता के कारण अब यहां ग्राहकों की संख्या में भारी इजाफा देखा जा रहा है-
1955 में स्थापित यह दुकान रोशनलाल बुधिराजा द्वारा शुरू की गई थी। अब इसे उनके बेटे वीरेंद्र बुधिराजा संभाल रहे हैं। यहां रोज, पाइनएप्पल और कोल्ड कॉफी जैसे फ्लेवर मिलते हैं। वीरेंद्र का कहना है कि फिल्म के बाद मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है। उनका मानना है कि फिल्म ने लोगों की 'याददाश्त ताजा' कर दी है। यहां की खासियत यह है कि आप बोतलबंद दूध सोडा भी खरीद सकते हैं।
फिल्म 'धुरंधर' में मोहम्मद आलम का किरदार लयारी (पाकिस्तान) में एक जूस की दुकान चलाता है। उनके द्वारा बोला गया कोड मैसेज न केवल कहानी का अहम हिस्सा बना, बल्कि इसने युवाओं के बीच दूध सोडा को एक 'कूल' ड्रिंक के रूप में स्थापित कर दिया। जो लोग पहले कभी इस ड्रिंक के बारे में नहीं जानते थे, वे भी अब दिल्ली की इन ऐतिहासिक गलियों में इसकी तलाश में पहुंच रहे हैं।