नई दिल्ली

पीएम नरेंद्र मोदी, शिवाजी महाराज और सावरकर पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट, दिल्ली कोर्ट का FIR दर्ज करने का आदेश

Karishma Aziz: पटियाला हाउस अदालत ने हिंदू धर्म, धार्मिक हस्तियों, ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में करिश्मा अजीज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
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Karishma Aziz

नई दिल्ली। पटियाला हाउस अदालत ने हिंदू धर्म, धार्मिक हस्तियों, ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में करिश्मा अजीज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि शिकायत में ऐसे संज्ञेय अपराधों के आरोप सामने आते हैं, जिनकी जांच जरूरी है और जिनसे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शिकायतकर्ता के पास उपलब्ध नहीं हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृदुल गुप्ता ने अधिवक्ता अमित़ा सचदेवा की ओर से दायर अर्जी पर यह आदेश दिया।

पोस्ट और वीडियो की जांच की मांग

अर्जी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत दाखिल की गई थी। इसमें फरवरी से अप्रेल 2025 के बीच अजीज के एक्स खाते से कथित तौर पर प्रकाशित पोस्ट और वीडियो की जांच की मांग की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन पोस्ट में हिंदू धार्मिक मान्यताओं और धार्मिक हस्तियों के अलावा प्रधानमंत्री मोदी, छत्रपति शिवाजी महाराज और स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पोस्ट में मुगल शासक औरंगजेब का महिमामंडन करते हुए हिंदू ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को नीचा दिखाने का प्रयास किया गया। साथ ही साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश का आरोप भी लगाया गया।

साइबर थाना ने पेश की रिपोर्ट

साकेत स्थित साइबर थाना, दक्षिण ने अदालत में पेश स्थिति रिपोर्ट में कहा कि संबंधित पोस्ट में अश्लील सामग्री, हिंदू धर्म को सीधे निशाना बनाने वाली सामग्री तथा राजनीतिक और ऐतिहासिक टिप्पणियां, आलोचना और व्यंग्य शामिल थे। हालांकि, पुलिस की जांच में साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के जानबूझकर किए गए प्रयास के प्रमाण नहीं मिले। अदालत ने कहा कि धारा 175(3) के तहत एफआईआर का आदेश सोच-समझकर दिया जाना चाहिए। इस स्तर पर शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता का विस्तृत परीक्षण करना या आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी पर अंतिम निष्कर्ष देना जरूरी नहीं है।

जांच करने का निर्देश दिया

अदालत ने कहा कि मामला किसी एक टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय में प्रकाशित कई पोस्ट से जुड़ा है। अदालत के अनुसार खाते के संचालन और लेखिका की पहचान, पोस्ट और वीडियो के प्रसार, उनकी तकनीकी जानकारी तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच जरूरी है। ये साक्ष्य पूरी तरह शिकायतकर्ता की पहुंच में नहीं हैं। अदालत ने एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार जांच करने का निर्देश दिया है। थाना प्रभारी को एक सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

Updated on:
17 Sept 2026 06:54 pm
Published on:
17 Sept 2026 05:55 pm