
DTC Drivers Strike: दिल्ली में DTC बसों की सेवाएं प्रभावित होने का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। बस ड्राइवरों, कंडक्टरों और बस संचालन से जुड़े अन्य कर्मचारियों की जारी हड़ताल के कारण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में हो रही परेशानी को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में DTC और सार्वजनिक बस सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई है। मामले की जानकारी 22 सितंबर 2026 को सामने आई।
यह याचिका पेशे से वकील और नियमित DTC यात्री अमी सिसोदिया ने दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और गृह विभाग के खिलाफ दायर की है। याचिकाकर्ता ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा है कि बस सेवाओं में लगातार व्यवधान के कारण रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में खास तौर पर महिलाओं की परेशानी का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार की मुफ्त बस यात्रा सुविधा पर निर्भर महिला यात्रियों को बस सेवाएं बाधित होने के कारण महंगे वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। याचिका के मुताबिक, इसका असर केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। छात्र, दिहाड़ी मजदूर, नौकरीपेशा लोग, बुजुर्ग, दिव्यांग, मरीज और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग भी सस्ती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर निर्भर हैं। बसों की कमी के चलते इन लोगों को अतिरिक्त खर्च और यात्रा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता ने बस बेड़े के बड़े स्तर पर प्रभावित होने और हजारों ड्राइवरों के हड़ताल में शामिल होने का हवाला दिया है। याचिका में कहा गया है कि कई यात्री बसों के अभाव में फंस रहे हैं या उन्हें महंगे परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। साथ ही, बस सेवाओं में कमी के कारण दिल्ली मेट्रो पर भी यात्रियों का अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि दिल्ली सरकार पहले DTC और क्लस्टर बस सेवाओं को आवश्यक सेवाओं से जुड़े वैधानिक ढांचे के तहत ‘महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन सेवा’ के रूप में मान्यता दे चुकी है।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि वह हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्तों या औद्योगिक विवाद से जुड़े मुद्दों पर अदालत से फैसला नहीं चाहतीं। याचिका में किसी व्यक्तिगत ड्राइवर या कंडक्टर के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग भी नहीं की गई है। इसके बजाय, याचिका में सरकार और संबंधित वैधानिक अधिकारियों को बस सेवाओं को पर्याप्त स्तर पर बहाल करने के लिए सभी जरूरी और कानूनी कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई है। पूरी तरह सेवाएं बहाल होने तक कम से कम इतना सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की मांग की गई है, जिससे आम लोगों को अनिश्चितकाल तक परेशानी न झेलनी पड़े। यह PIL संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विक्रांत डबास मामले की पैरवी कर रहे हैं।