
प्रेम संबंध टूटने को अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide) का अपराध नहीं माना जा सकता। यह अहम टिप्पणी हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने एक खुदकुशी मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि केवल रिश्ता खत्म होना भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत उकसावे की श्रेणी में नहीं आता।
यह मामला 27 वर्षीय युवती की आत्महत्या से जुड़ा है, जिसने अक्टूबर 2025 में फांसी लगाकर जान दे दी थी। युवती के पिता ने बाद में पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए नूर मोहम्मद नामक युवक पर आरोप लगाया कि उसने शादी के लिए धर्म परिवर्तन की शर्त रखी थी और इसी दबाव में उनकी बेटी ने आत्महत्या की।
शिकायत के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी ने अदालत को बताया कि वह आठ साल से युवती के साथ रिश्ते में था और दोनों ने शादी की योजना भी बनाई थी। हालांकि, दोनों के अलग-अलग धर्म होने के कारण परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। इसी वजह से दोनों अलग हो गए थे। जब नूर मोहम्मद ने दूसरी जगह शादी कर ली, तो उसके पांच दिन बाद युवती ने आत्महत्या कर ली। आरोपी ने यह भी कहा कि युवती की मौत उसके किसी दबाव की वजह से नहीं हुई।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मनोज जैन ने स्पष्ट किया कि आत्महत्या के लिए 'उकसाने' का अपराध तभी बनता है जब आरोपी का कृत्य ऐसा हो कि पीड़ित के पास जान देने के अलावा कोई दूसरा रास्ता न बचे। अदालत ने कहा कि आज के समय में ब्रेकअप और दिल टूटने की घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन केवल रिश्ता टूटना अपने आप में उकसावे का प्रमाण नहीं है।
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि युवती ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था, जिसमें आरोपी को जिम्मेदार ठहराया गया हो। आठ साल के संबंध के दौरान भी युवती की ओर से कभी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।
अदालत के सामने पेश की गई युवती की निजी डायरी में उसने आरोपी से शादी करने की इच्छा जाहिर की थी। लेकिन कहीं भी धर्म परिवर्तन के दबाव का जिक्र नहीं किया था। उसके दोस्तों के बयानों में यह सामने आया कि युवक के किसी और से शादी कर लेने के बाद वह बेहद दुखी थी। हालांकि, दोस्तों ने अपने बयान में धर्म परिवर्तन की किसी शर्त या दबाव का जिक्र नहीं किया।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दोनों के बीच बातचीत बंद होने और युवती की आत्महत्या के बीच काफी दिनों का अंतर था। लेकिन कोर्ट ने माना कि यह एक टूटे हुए रिश्ते का मामला है, जिसमें युवती अपने पार्टनर को किसी और के साथ देखकर शायद सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई।
इन सभी तथ्यों व दलीलों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फिलहाल आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होता।