Delhi High Court : कोर्ट ने कहा कि आपको बताना होगा कि आरटीआई की धारा 4 को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यहां तक कहा कि आपको ढोल पीटकर भी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 17 अप्रैल को होगी।
Delhi High Court :दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी की बड़ी लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। इसके साथ ही एमसीडी से हलफनामा दायर कर मामले की विस्तृत जानकारी मांगी है। यह मामला साल 2005 में लागू किए गए आरटीआई एक्ट से जुड़ा है। दिल्ली नगर निगम के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ता ने हस्तक्षेप की मांग करते हुए मुद्दा उठाया था। इस मामले की सुनवाई करते समय दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ-साफ कहा कि एमसीडी पारदर्शिता के साथ काम नहीं कर रही है और इसी बात पर उसे फटकार लगाई गई है। मामला सूचना का अधिकार कानून के पालन न करने जुड़ा है। कोर्ट ने हैरानी जताई कि एमसीडी ने पिछले 20 सालों से अपनी वेबसाइट पर जरूरी सार्वजनिक दस्तावेज अपडेट नहीं किए हैं।
दरअसल, दिल्ली एमसीडी के खिलाफ दायर एक याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई की। इस याचिका में कहा गया था कि साल 2005 में आरटीआई एक्ट लागू होने के बावजूद दिल्ली नगर निगम (MCD)लगातार नियमों की अनदेखी कर रहा है। इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने दिल्ली नगर निगम से कई कड़े सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा कि यह किस तरह काम कर रहे हैं। जानकारी 120 दिनों के भीतर अपलोड करना आपका कानूनी दायित्व है, बल्कि और भी कम समय में करना होता है। लेकिन आपने अब तक क्या किया?
दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कहा कि आरटीआई एक्ट 2005 में लागू हुआ था। लेकिन दो दशक बीत जाने के बाद भी दिल्ली नगर निगम ने पारदर्शिता के नियमों का पालन नहीं किया। एमसीडी ने अपनी वेबसाइट पर सदन के फैसलों, प्रस्तावों और कमेटियों की रिपोर्ट जैसी जानकारियां अपलोड नहीं की हैं। अदालत ने एमसीडी के वकील से सवाल किया कि पिछले 20 सालों से विभाग क्या कर रहा था? अब तक इस मामले की कोई सुध क्यों नहीं ली गई। कोर्ट ने कहा कि एमसीडी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की। बेंच ने साफ- साफ कहा कि इस मामले में किसी भी तरह का बहाना या आनाकानी स्वीकार नहीं की जाएगी और यह बात तो साफ है कि एमसीडी ने आरटीआई एक्ट के तहत अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया।
दिल्ली नगर निगम की इस लापहरवाही का खुलासा तब हुआ, जब दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर हुई। याचिकाकर्ता ने कहा कि एमसीडी अपनी वेबसाइट पर जरूरी जानकारी अपडेट नहीं कर रही है। सेंटर फॉर यूथ कल्चर एंड लॉ एनवायरनमेंट का कहना है कि बजट जैसी जानकारी भी वहां नहीं मिल रही, जबकि नियम के मुताबिक सरकार को यह जानकारी खुद ही लोगों को देनी चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान एमसीडी ने कहा कि वे सुधार कर रहे हैं और जानकारियां पब्लिश करने पर विचार चल रहा है। लेकिन कोर्ट ने इस पर संतुष्टि नहीं जताई और एमसीडी को एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
एमसीडी ने अपने आप को बचाते हुए कहा कि वे अपने काम सुधार में कर रहे हैं और जरूरी जानकारी को सार्वजनिक करने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन कोर्ट ने इस पर संतुष्टि नहीं जताई और एमसीडी को एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि आपको बताना होगा कि आरटीआई की धारा 4 को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यहां तक कहा कि आपको ढोल पीटकर भी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 17 अप्रैल को होगी।