Delhi Maharashtra ATF Tax: दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार ने हवाई ईंधन पर वैट घटाकर 7% कर दिया है। इस फैसले से संकट से जूझ रही एयरलाइंस कंपनियों को भारी राहत मिलेगी और यात्रियों पर भी महंगे टिकट का बोझ नहीं बढ़ेगा।
Air Ticket Prices India: दुनियाभर में चल रहे तनाव और महंगे होते कच्चे तेल के बीच भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। देश के दो सबसे बड़े हवाई अड्डों वाले राज्यों दिल्ली और महाराष्ट्र की सरकारों ने हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर लगने वाले वैट को भारी कटौती के साथ सिर्फ 7% कर दिया है। यह फैसला 15 मई से अगले छह महीनों के लिए लागू किया गया है। चूंकि किसी भी एयरलाइन को चलाने के कुल खर्च में लगभग 40% हिस्सा अकेले ईंधन का होता है, इसलिए इस कदम से विमान कंपनियों को अपने घाटे से उबरने और टिकट की कीमतों को काबू में रखने में बड़ी मदद मिलेगी।
दिल्ली सरकार ने ईंधन पर वैट को 25% से घटाकर 7% किया है, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने इसे 18% से कम करके 7% पर ला दिया है। इस अस्थायी छह महीने के फैसले से दिल्ली सरकार को लगभग ₹985 करोड़ और महाराष्ट्र सरकार को ₹550 से ₹600 करोड़ के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि, दिल्ली और मुंबई देश के सबसे बड़े एविएशन हब हैं, इसलिए इस कटौती का सीधा सकारात्मक असर पूरे देश के हवाई नेटवर्क पर पड़ेगा।
आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब फ्लाइट की टिकटें सस्ती होंगी? एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि टिकटों के दाम सीधे तौर पर कम नहीं होंगे, बल्कि यह कदम महंगाई पर ब्रेक लगाने का काम करेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण उड़ानों को लंबे रास्ते तय करने पड़ रहे हैं, जिससे कंपनियों का खर्च पहले ही बहुत बढ़ चुका है। ऐसे में एयरलाइंस इस बचत का उपयोग अपने मौजूदा घाटे की भरपाई करने और टिकटों की कीमतों को एक स्तर पर रोकने के लिए करेंगी। यानी, आपकी जेब पर अचानक से बढ़ने वाला भारी-भरकम बोझ टल जाएगा।
कंपनियों का खर्च घटेगा
ईंधन पर टैक्स कम होने से एयरलाइंस का रोजाना का ऑपरेटिंग खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।
घरेलू उड़ानों को सीधी राहत
भारत के भीतर उड़ान भरने वाली घरेलू फ्लाइट्स को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।
अचानक दाम बढ़ने पर रोक
आने वाले समय में जो हवाई टिकट बहुत ज्यादा महंगे होने वाले थे, उन पर अब लगाम लगेगी।
संकट के समय बड़ा सहारा
युद्ध और महंगे कच्चे तेल के इस वैश्विक संकट में डूबते विमानन उद्योग को एक मजबूत सहारा मिलेगा।