नई दिल्ली

Fake Medicines: करोड़ों लोगों की जान से खेलने वाले बड़े रैकेट का भांडा फूटा, छह लोग गिरफ्तार

Fake Medicines: पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि नकली दवाओं की बड़ी खेप दिल्ली लाई जा रही है। इस सूचना के आधार पर हेड कांस्टेबल जितेंद्र के नेतृत्व में 30 जुलाई को सिविल लाइंस के एक पेट्रोल पंप पर जाल बिछाया गया।

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दिल्ली पुलिस ने नकली दवाओं के रैकेट का भंडाफोड़ किया।

Fake Medicines: राजधानी में क्राइम ब्रांच की एंटी गैंग स्क्वॉड ने बुधवार को नकली लाइफ सेविंग दवाओं का एक बड़ा अंतरराज्यीय रैकेट पकड़ा है। इस कार्रवाई में 6 लोग गिरफ्तार हुए हैं, जिनमें गिरोह के सरगना राजेश मिश्रा भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह देश के कई राज्यों में सक्रिय था और मुरादाबाद, देवरिया, गोरखपुर, पानीपत, जींद, बद्दी व सोलन जैसे इलाकों से संचालित होता था। गिरोह ने Johnson & Johnson, GSK, Alkem जैसी बड़ी फार्मा कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं बनाकर बेच रहा था, जो कि मरीजों के लिए गंभीर खतरा थी।

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मुखबिर के इनपुट पर पकड़ा गया गिरोह

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि नकली दवाओं की बड़ी खेप दिल्ली लाई जा रही है। इस सूचना के आधार पर हेड कांस्टेबल जितेंद्र के नेतृत्व में 30 जुलाई को सिविल लाइंस के एक पेट्रोल पंप पर जाल बिछाया गया। जैसे ही यूपी नंबर की वैगनआर कार वहां पहुंची, पुलिस ने उसे रोक लिया। कार में सवार मोहम्मद आलम और मोहम्मद सलीम, जो मुरादाबाद के रहने वाले हैं, से भारी मात्रा में नकली Ultracet और Augmentin की टैबलेट बरामद हुईं। मौके पर Johnson & Johnson और GSK के प्रतिनिधियों ने दवाओं की पैकिंग और स्टैंपिंग को नकली करार दिया, जिसे बाद में लैब टेस्ट ने भी पुष्ट किया।

रैकेट का उच्चस्तरीय संचालन

पुलिस के अनुसार यह रैकेट अत्यंत संगठित और हाई-टेक था। गिरोह सोशल मीडिया जैसे Facebook के माध्यम से संपर्क करता था। नकली दवाओं की पैकेजिंग के लिए बॉक्स, फॉयल और ब्लिस्टर पैकिंग अलग-अलग स्थानों से मंगाए जाते थे। हिमाचल प्रदेश के बद्दी से फॉयल सामग्री आती थी, जबकि नकली दवाएं हरियाणा के जींद और हिमाचल के बद्दी में बने फैक्ट्रियों में तैयार की जाती थीं। सप्लाई रेल और रोड मार्गों से होती थी। लेन-देन फर्जी बैंक खातों और हवाला चैनलों के जरिए किया जाता था।

ये आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने नकली दवाओं की बिक्री में 35 साल के मुरादाबाद निवासी मोहम्मद आलम को गिरफ्तार किया। मोहम्मद आलम NCR क्षेत्र में दवाओं की सप्लाई का प्रभारी था। जबकि मुरादाबाद निवासी 42 साल का सलीम सप्लाई और ट्रांसपोर्ट सहायक के तौर पर काम करता था। मुरादाबाद निवासी 29 साल का जुबैर नकली दवाओं का सप्लायर, चैट और पेमेंट कनेक्शन का काम संभालता था। जबकि देवरिया निवासी 25 साल का प्रेम शंकर प्रजापति मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक कार्य संभालता था। गोरखपुर निवासी 52 साल का राजेश मिश्रा इस गिरोह का मास्टरमाइंड और संचालनकर्ता है और हरियाणा के जींद निवासी 50 साल क परमानंद ‘लक्ष्मी मां फार्मा’ के नाम से नकली Ultracet बनाता था।

भारी मात्रा में जब्त की गई ये सामग्री

पुलिस ने निम्नलिखित नकली दवाओं की बड़ी मात्रा जब्त की है। इसमें Ultracet 9015 टैबलेट्स, Augmentin 625 के 6100 टैबलेट्स, Pan-40 के 1200 टैबलेट्स, Betnovate-N 1166 ट्यूब्स, Amoxycillin 25650 टैबलेट्स, PCM 5900 टैबलेट्स, Kenacort Injection 74 बॉक्स, Proyco SPAS 12000 टैबलेट्स बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही, फैक्ट्रियों से 150 किलो लूज टैबलेट्स, 20 किलो लूज कैप्सूल, 10 रोल फॉयल और हजारों पैकिंग बॉक्स जैसे Zerodol SP, Pantop DSR आदि भी बरामद हुए हैं।

पैकिंग बॉक्स और ब्रांडेड सामग्री बरामद

पुलिस ने Zerodol SP (900 बॉक्स), Pantop DSR (300 बॉक्स), Clavam 625 (10 बॉक्स), Veef-O LB (200 बॉक्स), Vemox-625 LB (1000 बॉक्स) समेत अन्य ब्रांडेड दवाओं के खाली पैकिंग बॉक्स भी जब्त किए हैं, जो नकली दवाओं की पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।

स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा

पुलिस ने बताया कि यदि ये नकली दवाएं मरीजों को दी जातीं, तो इससे जानलेवा स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता था। यह रैकेट न केवल देश की स्वास्थ्य प्रणाली को खतरे में डालता है, बल्कि फार्मा कंपनियों की साख को भी नुकसान पहुंचाता है। पुलिस फिलहाल इस गिरोह के अन्य सदस्यों, पैसों के लेन-देन और सप्लायर्स तक पहुंचने के लिए कड़ी छानबीन कर रही है।

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