जब भी कोई भी ग्रहण लगता है तो उसके पहले से सूतक काल लग जाता है। इस दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते। यहां तक कि मंदिर का कपाट भी बंद रहता है।
नई दिल्ली : जब भी कोई भी ग्रहण लगता है तो उसके बहुत पहले से सूतक काल लग जाता है। इस दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते। यहां तक कि इस दौरान मंदिर का कपाट भी बंद रहता है। शुक्रवार को भी चंद्रग्रहण के चलते लगे सूतक काल के दौरान देशभर के सभी मंदिर बंद रहे, लेकिन वहीं दिल्ली का कालकाजी मंदिर खुला रहा। श्रद्धालुओं ने वहां आम दिनों की तरह रात के 12 बजे तक मां के दर्शन किए। एक बात और गौर करने वाली है कि इस दौरान अन्य दिनों की अपेक्षा मंदिर में काफी ज्यादा संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
महंत ने बताई ये वजह
इस बारे में कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत का कहना है कि सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण इस दौरान सूतक काल से लेकर मोक्ष काल तक सभी मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, लेकिन सिद्धपीठ कालकाजी मंदिर का कपाट भक्तों के लिए इसलिए खुला रहा, क्योंकि स्वयं मां के भवन में 12 राशियां और 9 ग्रह विराजमान हैं। वह मां के पुत्रों के रूप में रहते हैं। इसके अलावा मां कालका स्वयं काल की स्वामिनी हैं। इसी वजह से सूतक काल में मंदिर के कपाट बंद नहीं किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि 104 वर्ष बाद ऐसा संयोग बना, जिसकी वजह से सबसे लंबा चंद्र ग्रहण देखा गया। बता दें कि इस बार की चंद्र ग्रहण की अवधि 235 मिनट की थी।
सूतक काल दिन के 2:54 में ही लग गया था
बता दें कि चंद्र ग्रहण तो शुक्रवार रात 11: 54 में लगा था, जो शनिवार की सुबह 3:49 तक बना रहा। लेकिन सूतक काल शुक्रवार दिन के 2:54 बजे से शुरू हो गया था।
बादल की वजह से एनसीआर के लोग नहीं देख पाए चंद्र ग्रहण
शुक्रवार की रात 21वीं सदी का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण लगा था। इसे लेकर लोगों में काफी उत्साह था, लेकिन दिल्ली-एनसीआर में खराब मौसम की वजह से लोग इसे नहीं देख पाए। लेकिन देश के कई हिस्सों में इसे साफ देखा गया।
21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण
27 जुलाई की रात को 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण देखा गया। यह एक ऐतिहासिक नज़ारा था। चंद्रग्रहण के दौरान चांद ने धीरे-धीरे अपना रंग बदला। भारत में करीब देर रात एक बजे पूर्ण चंद्रग्रहण शुरू हुआ, इस दौरान चांद पूरी तरह लाल हो गया। चंद्रग्रहण की वजह से देश के कई बड़े मंदिरों को बंद कर दिया गया था। शनिवार सुबह चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद मंदिरों के कपाट खोल दिए गए हैं। देश के कई बड़े मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन भी किया गया है। वहीं, दिल्ली का कालकाजी मंदिर भक्तों के लिए खुला रहा।