नई दिल्ली

साकेत में दर्दनाक हादसा: बच्चों की जान बचाते-बचाते खुद दुनिया छोड़ गईं कैंटीन वाली आंटी

Delhi building collapse: बच्चों की जान बचाते-बचाते खुद ही मलबे में दब गई दिल्ली की कैंटीन वाली आंटी। साकेत में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में कैंटीन वाली आंटी ने खुद की जान की परवाह किए बिना दर्जनों बच्चों को मौत के मुंह से बाहर निकाला, लेकिन खुद की जान गवा बैठी।
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May 31, 2026
delhi saket building collapse
PHOTO IANS

Saket metro station accident: दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजाब इलाके में शनिवार शाम को एक दर्दनाक हासदे ने सबकी रूंह कपा दी है। यहां एक तीन मंजिल की कमर्शियल इमारत में अचानक भरभराकर गिर गई, जिसमें पास ही बने एक कैंटीन को अपना शिकार बना लिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की खबर सामने आई है। लेकिन इस बर्बादी के बीच इंसानियत और बहादुरी की एक ऐसी शानदार मिसाल सामने आई है, जिसने हर एक के दिल को छू लिया। इलाके के स्टूडेंट्स के बीच मां के रूप में फैमस कैंटीन मालकिन पार्वती ओझा ने खुद की जान के बारे में सोचे बिना, वहां मौजूद दर्जनों कोचिंग में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की जान बचाई, लेकिन खुद मलबे में ही फंस कर रह गई।

चिल्लाकर- चिल्लाकर बचाई बच्चों की जान

हादसे के समय नेपाल की रहने वाली 50 साल की पार्वती ओझा अपने जीजा हरि प्रसाद के साथ कैंटीन में ही थीं। जैसे ही बगल की इमारत में तेज कंपन होने की भनक लगी, दोनों तुरंत बाहर की तरफ भागे। बाहर आकर उन्होंने देखा कि बिल्डिंग गिर रही है। तभी पार्वती को याद आया कि कैंटीन के अंदर और आस-पास करीब 20-25 छात्र मौजूद होते हैं, उनको बचाया नहीं तो सब बच्चे मलबे के बीच फंस जाएंगे। छात्रों को अंदर चल रहे बड़े कूलरों की आवाज के कारण खतरे के बारे में पता नहीं चला था।
पार्वती ने समय बर्बाद किए बिना बच्चों को बचाने के लिए कैंटीन के अंदर भागी। जोर-जोर से चिल्लाकर- चिल्लाकर छात्रों को बाहर निकलने को कहा और खुद भी जल्दी जल्दी बाहर निकलाने लगी। लेकिन इसी बीच मलबे का एक बड़ा हिस्सा कैंटीन पर गिर गया और वह खुद अंदर ही फंस गईं।

बच्चे कैंटीन आंटी को मां मानते थे

सैदुलाजाब की इस वेस्टर्न मार्ग वाली बिल्डिंग में कई कोचिंग इंस्टीट्यूट और कैफे मौजूद थे, जहां देश भर से आकर बच्चे कई अलग अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। यहीं पर पार्वती भी 20 साल से अपना चला रही थी। आंटी के साथ बच्चे परिवार की तरह रहते थे। छात्रों ने रोते हुए बताया कि आंटी सिर्फ 20 रुपए में उन्हें भरपेट खाना खिलाती थीं। अगर किसी बच्चे के पास पैसे नहीं होते तब भी पेटभर खाना फ्री में खिला देती थी। वह खाना खिलाने के साथ ही हर बच्चे से घर की तरह पूछती थीं कि समय पर सोए या नहीं, या पढ़ाई को लेकर ज्यादा परेशान तो नहीं हो।

हादसे से पहले 12 आलू पराठे बनाए

पार्वती के परिवार ने बताया कि हादसे से कुछ देर पहले ही उन्होंने बच्चों की फरमाइश वाले 12 आलू पराठे और 4 कोल्ड कॉफी तैयार कर के रखी थी। वह हमेशा मेन्यू से हटकर जो कुछ बच्चों को पसंद था वो खाना बना दिया करती थीं। रविवार को जब मलबे से उनका शव निकालकर एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, तो वहां रोते-बिलखते छात्रों का हुजूम उमड़ पड़ा। प्रशासन के मुताबिक, बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर चल रहे अवैध या कमजोर निर्माण काम कारण यह हादसा हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है। लेकिन छात्रों का कहना है कि वे अपनी इस कैंटीन वाली मां के कर्ज को जिंदगी कभी नहीं भूल सकते।

Updated on:
31 May 2026 07:23 pm
Published on:
31 May 2026 07:23 pm