भारतीय वायुसेना राजस्थान के पोखरण में हुए शक्ति प्रदर्शन ऑयरन फिस्ट के दौरान दो लक्ष्य को भेदने में रही नाकामी का मूल्याकंन करेगी। ये अभ्यास 18 मार्च को पोखरण में हुए थे।
मिराज 2000 लड़ाकू विमान के जरिए अमरीका निर्मित लेजर गाइडेड बम को चंदन फायरिंग रेंज में एक पूर्व निर्धारित स्थिर लक्ष्य पर गिराया गया। लेकिन ये लक्ष्य को भेदने में नाकाम रहा। इस लक्ष्य को दुश्मन की रडार साइट माना गया था और 3एन नाम दिया गया। इसी तरह सोवियत निर्मित ओएसए एके-एम सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम भी अपने लक्ष्य को नहीं भेद सका। एक अधिकारी ने बताया कि दो मिसाइलों में से एक अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई। ऐसा लगता है कि फ्यूज ने काम नहीं किया जिसकी वजह से मिसाइल लक्ष्य के नजदीक पहुंचने में नाकाम रही।
10 फीसदी नाकामी की रहती है संभावना
रिपोर्ट में भारतीय वायुसेना की प्रवक्ता विंग कमांडर रोशेल डिसिल्वा के हवाले से कहा गया कि जैसी उम्मीद थी हथियारों ने वैसा ही प्रदर्शन किया। नियंत्रित परिस्थितियों में हथियारों का लक्ष्य को नहीं भेदना चिंता का विषय है। लेकिन वायुसेना का कहना है कि हथियारों में से 10 फीसदी के काम नहीं करने की संभावना रणनीतिक प्रक्रिया में शामिल रहता है। ऑयरन फिस्ट में 103 लड़ाकू विमानों समेत कुल 181 विमानों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा कई वेपन सिस्टम्स का भी इस्तेमाल किया गया।