
EWS Reaservation: दिल्ली हाईकोर्ट में EWS वर्ग के लोगों की याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें सरकारी नौकरी और सीधी भर्तियों में उम्र सीमा में छूट और परीक्षा देने के ज्यादा मौके की मांग की गई थी। इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह फैसला सरकार की नीति से जुड़ा है, इसलिए कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता।
याचिकाकर्ताओं ने DoPT के 2019 के आदेश, 2022 के FAQs और संघ लोक सेवा आयोग की 2024 की सिविल सेवा परीक्षा नोटिफिकेशन को गलत बताया और उसे चुनौती दी। उनका कहना था कि 103वें संविधान संशोधन के बाद EWS वर्ग को 10% आरक्षण तो दिया गया, लेकिन उन्हें SC, ST और OBC की तरह उम्र में छूट या ज्यादा मौके नहीं मिले। उनके अनुसार यह बराबरी के अधिकार के खिलाफ है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है।
हाईकोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि सरकार अगर EWS वर्ग को उम्र में छूट या ज्यादा मौके नहीं देती, तो यह गलत नहीं है और न ही संविधान के खिलाफ नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी मांगों के लिए कोर्ट किसी तरह का आदेश नहीं दे सकता। कोर्ट के अनुसार, यह फैसला पूरी तरह से विधायिका और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।
कोर्ट ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा के नियमों में उम्र सीमा और प्रयासों की संख्या पहले से तय है और इन नियमों में EWS के लिए कोई विशेष छूट शामिल नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि सरकार भविष्य में ऐसी कोई नीति बनाती है तो वह अलग बात होगी, लेकिन हाल ही में ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है। साथ ही अनुच्छेद 342A का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य की OBC सूचियां अलग हो सकती हैं और उसी आधार पर लाभ तय होते हैं।