
सड़क दुर्घटना में मारी गई महिला की मां को 92.58 लाख का मुआवजा
Motor Accident Claims Tribunal Order: दिल्ली की एक मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने साल 2016 में गोवा में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाली 28 साल की युवती की मां को 92.58 लाख रुपए का भारी-भरकम मुआवजा देने का आदेश दिया है। दरअल, न्यायाधिकरण की पीठासीन अधिकारी ऋचा मनचंदा ने मृतका मेघा सहरावत की मां द्वारा दायर की गई दावा याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया।
यह दुखद घटना 30 दिसंबर 2016 को गोवा में हुई थी, जब एक तेज रफ्तार मिनी बस ने मेघा की स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस हादसे में मेघा को गंभीर चोटें आईं और उनकी मृत्यु हो गई। न्यायाधिकरण ने 6 जून को जारी अपने आदेश में कहा, 'रिकॉर्ड पर आए सबूतों और गवाहों के आधार पर याचिकाकर्ता यह साबित करने में पूरी तरह सफल रहे हैं कि मृतका की मौत मिनी बस के चालक द्वारा बरती गई अत्यधिक लापरवाही और तेज रफ्तार वाहन चलाने के कारण आई गंभीर चोटों की वजह से हुई थी।'
ट्रिब्यूनल ने पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR), चार्जशीट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी सबूतों पर भरोसा जताया। अदालत ने यह भी नोट किया कि दुर्घटना के वक्त बस चलाने वाले ड्राइवर प्रदीप नामदेव शेतगांवकर ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज करने के लिए अदालत के सामने कोई गवाही या सबूत पेश नहीं किया।
बता दें कि मृतका की मां कुसुम ने मुआवजे के लिए न्यायाधिकरण का रुख किया था। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने बीटेक और एमबीए (MBA) की पढ़ाई की थी और वह मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत थीं, जिससे वे अपनी मां को आर्थिक रूप से पूरा सहारा देती थीं। हालांकि, सुनवाई के दौरान रोजगार से जुड़े कुछ आधिकारिक दस्तावेज पूरी तरह से प्रमाणित नहीं हो सके थे, लेकिन न्यायाधिकरण ने मेघा के बैंक खाते के बयानों पर भरोसा किया, जिसमें उनकी सैलरी क्रेडिट होने के स्पष्ट सबूत थे। इसके आधार पर ट्रिब्यूनल इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि हादसे के वक्त मेघा की नेट मंथली सैलरी (प्रति माह शुद्ध वेतन) 64,342 रुपए थी।
अदालत ने कुल 92.58 लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया है कि 19 अप्रैल 2017 से लेकर मुआवजे की वास्तविक वसूली तक इस राशि पर 7.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी दिया जाएगा।न्यायाधिकरण ने नोट किया कि दुर्घटना के समय आरोपी वाहन का बीमा (Insurance) वैध था, इसलिए उसने संबंधित बीमा कंपनी को आदेश जारी किया है कि वह अगले 30 दिनों के भीतर मुआवजे की यह पूरी राशि अदालत में जमा कराए।
Updated on:
15 Jun 2026 05:47 pm
Published on:
15 Jun 2026 05:41 pm
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