
मन की शांति के लिए DNA टेस्ट करवाने को सोचा था (फोटो X)
IVF fraud case Delhi: दिल्ली के एक नामी आईवीएफ अस्पताल पर बच्चों के माता-पिता के फर्जी साइन करने और नकली दस्तावेज बनाने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में साकेत कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज विशाल सिंह ने अस्पताल की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें वे जांच रोकने की मांग कर रहे थे। कोर्ट ने पुलिस को साफ निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और हर दो हफ्ते में इसकी रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को सौंपी जाए।
जज विशाल सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अस्पताल के रिकॉर्ड्स में साफ तौर पर गड़बड़ी नजर आ रही है। मुमकिन है कि पीड़ित माता-पिता के आरोप पूरी तरह सच हों। कोर्ट ने माना कि आईवीएफ और सरोगेसी से जुड़े तकनीकी दस्तावेज अस्पताल के पास ही होते हैं, इसलिए पीड़ित कपल से सबूतों की उम्मीद नहीं की जा सकती। पुलिस को आदेश दिया गया है कि वे सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, कंसेंट फॉर्म, लैब लॉग और एम्ब्रियो ट्रांसफर शीट जैसे सभी जरूरी सबूतों को सुरक्षित रखें ताकि कोई छेड़छाड़ न हो सके।
पीड़ित कपल राहुल और मीनू का आरोप है कि अस्पताल ने उनके फर्जी साइन किए। अस्पताल ने यह झूठी कहानी रची कि उनके खुद के एग और स्पर्म बच्चे के लिए सही नहीं थे। यही नहीं, एक डोनर के इंश्योरेंस रिकॉर्ड पर नकली सर्टिफिकेट नंबर भी पाए गए हैं। पिछले पांच-छह महीनों से यह परिवार इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा है, जिसके कारण राहुल काम पर भी नहीं जा पा रहे हैं।
दिल्ली सचिवालय के बाहर खड़े राहुल और मीनू ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में आईवीएफ इंडस्ट्री सिर्फ पैसे कमाने का जरिया बन चुकी है। मीनू ने कहा आप जैसे चाहें वैसे पैसे कमाएं, लेकिन बच्चों का सौदा करके पैसे मत कमाएं। इस सब के बावजूद उन्होंने उन दोनों बच्चियों को नहीं छोड़ा है। जिन्हें वे प्यार से चीकू और स्ट्रॉबेरी बुलाते हैं। राहुल ने कहा कि जब तक उनके असली माता-पिता सामने नहीं आते वे इन बच्चियों को अपनी बेटी की तरह पालेंगे।
माता-पिता के मुताबिक, उनके गायनेकोलॉजिस्ट ने उन्हें एक IVF स्पेशलिस्ट से मिलवाया। जिसके बाद वे दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित SCI IVF हॉस्पिटल पहुंचे। 9 जनवरी 2025 को जांच-पड़ताल शुरू हुई। तीन महीने बाद उसी साल 14 मई को मेडिकल टीम ने बताया कि पांच स्वस्थ भ्रूण सफल तरह से विकसित हो गए थे। उसी दिन उनमें से तीन भ्रूण इम्प्लांट कर दिए गए।
जानकारी के मुताबिक, मीनू ने 5 जनवरी को मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था। लेकिन उनकी माता-पिता बनने की खुशी ज्यादा दिन नहीं रह सकी क्योंकि उनके मन में शक होने लगा कि दोनों बच्चियां हम में किसी पर क्यों नहीं गई। मन की शांति के लिए राहुल ने कहा कि उन्होंने IVF क्लिनिक के जरिए DNA टेस्ट करवाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अस्पताल के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। आखिरकार उस जोड़े ने 8 जनवरी 2026 को दो अलग-अलग DNA टेस्टिंग एजेंसियों को सैंपल दिए। जिसके नतीजे 10 और 14 जनवरी को आए। जेनेटिक प्रोफाइल में खुलासा हुआ कि जुड़वां बच्चियों का राहुल या मीनू से कोई बायोलॉजिकल रिश्ता नहीं था। रिपोर्ट से पता चला कि बच्चियों का आपस में भी कोई बायोलॉजिकल रिश्ता नहीं था। वे पूरी तरह से अनजान डोनर के एम्ब्रियो से पैदा हुई थीं।
Published on:
15 Jun 2026 02:19 pm
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