नई दिल्ली

‘मुझे तो यकीन नहीं हो रहा’, पंडित धीरेंद्र शास्त्री से मिले पूर्व CJI बीआर गवई, आग बबूला हुए SC के वकील

Justice BR Gavai Bageshwar Dham: पूर्व जस्टिस बी.आर. गवई और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की मुलाकात की फोटो वायरल। वकील प्रशांत भूषण ने न्यायपालिका की गरिमा पर उठाए सवाल।

2 min read
पंडित धीरेंद्र शास्त्री से मिले पूर्व CJI बीआर गवई

Justice BR Gavai: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई की बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। जस्टिस गवई ने अपने परिवार के साथ धीरेंद्र शास्त्री से मुलाकात की, जिसके बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण सहित कई कानूनी विशेषज्ञों ने न्यायाधीश के इस आचरण पर कड़े सवाल उठाए हैं।

मशहूर वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस मुलाकात की फोटो साझा करते हुए न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा है। भूषण ने तंज कसते हुए पूछा कि एक विवादित कथावाचक के साथ सार्वजनिक रूप से दिखकर जस्टिस गवई न्यायपालिका और देश को क्या संदेश देना चाहते हैं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को 'नफरत फैलाने वाला' बताते हुए इस मुलाकात को न्यायिक मर्यादा के खिलाफ बताया।

ये भी पढ़ें

दिल्ली में IRS अफसर की बेटी की घर में हत्या, रेप की भी आशंका; शक के घेरे में पुराना नौकर

क्यों हो रहा है विवाद?

विवाद की मुख्य वजह धीरेंद्र शास्त्री का अतीत और उनके बयान हैं। बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री अक्सर अपने चमत्कारों के दावों, महिलाओं पर की गई टिप्पणियों और 'हिंदू राष्ट्र' जैसे बयानों को लेकर विवादों में रहते हैं। आलोचकों का तर्क है कि जब कोई उच्च पदस्थ न्यायाधीश ऐसे व्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से दिखता है, तो इससे समाज में यह संदेश जाता है कि न्यायपालिका एक खास विचारधारा या अंधविश्वास को बढ़ावा दे रही है।

कौन हैं धीरेंद्र शास्त्री ?

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के प्रमुख और पीठाधीश्वर हैं, जहाँ से वे देश-दुनिया में अपनी विशेष पहचान बना चुके हैं। उनके चर्चित होने की सबसे बड़ी वजह उनका 'दिव्य दरबार' है, जहाँ वे बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़ के बीच किसी भी अनजान व्यक्ति को बुलाकर उसके नाम, परिवार और समस्या का विवरण एक कागज के टुकड़े (पर्चा) पर पहले ही लिख देने का दावा करते हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस मुलाकात के बाद इंटरनेट पर दो पक्ष बन गए हैं। एक पक्ष का कहना है कि न्यायाधीश की अपनी निजी धार्मिक आस्था हो सकती है और वे कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं। वहीं, दूसरे पक्ष (जिसमें प्रशांत भूषण शामिल हैं) का मानना है कि न्यायाधीशों को ऐसे विवादित और 'स्वघोषित' धर्मगुरुओं से दूरी बनानी चाहिए ताकि न्यायपालिका की निष्पक्ष छवि पर कोई आंच न आए।

फिलहाल, इस पूरे मामले पर न्यायपालिका या जस्टिस गवई की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इसने न्यायिक सुधारों और 'जजों के कंडक्ट' की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।

Published on:
22 Apr 2026 03:25 pm
Also Read
View All