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जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कोर्ट विवाद: हाई कोर्ट के जज ने केजरीवाल केस की सुनवाई से बनाई दूरी

Arvind Kejriwal: दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस तेजस कारिया ने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ चल रहे एक मामले की सुनवाई से खुद को पीछे हटा लिया है। जज के इस फैसले के बाद, बुधवार को इस केस पर होने वाली कार्यवाही टल गई।
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नई दिल्ली

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Pooja Gite

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Updated: 22 Apr 2026, 2:46 PM IST

Delhi High Court:दिल्ली हाई कोर्ट में अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी के नेताओं और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई टल गई। जस्टिस तेजस कारिया ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है, जिसके कारण चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और उनकी बेंच इस पर आगे नहीं बढ़ सकी। यह पूरा विवाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में हुई कार्यवाही की अवैध रिकॉर्डिंग और उसे सोशल मीडिया पर साझा करने से जुड़ा है। अधिवक्ता वैभव सिंह द्वारा दायर इस याचिका में सभी आरोपियों पर अदालत की अवमानना की कार्रवाई करने और उन वीडियो को हटाने की मांग की गई है।

बुधवार को जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो अदालत ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई नहीं हो पाएगी। अदालत ने कहा , ‘इस मामले को किसी ऐसी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए जिसमें हम में से एक (तेजस कारिया) सदस्य नहीं हैं। इसे कल दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए।’ हालांकि, जस्टिस कारिया के फैसले के पीछे कोई वजह सामने नहीं आई है।

क्या है मामला?

दरअसल, अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि कथित शराब घोटाले से जुड़े केस से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा खुद को अलग कर लें। केजरीवाल की ओर से दायर रिक्यूजल याचिका पर पूर्व सीएम ने अदालत में खुद जिरह की थी। 13 अप्रैल को उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में खड़े होकर उनपर कई सवाल उठाए और कहा कि उनके मन में आशंका है कि इस बेंच से न्याय नहीं मिलेगा। बाद में आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए थे।

किन लोगों पर है आरोप?

अदालत की अवमानना से जुड़ी इस शिकायत में अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और संजीव झा के नाम शामिल हैं। इनके अलावा, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के विरुद्ध भी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

याचिका का मुख्य आधार

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि आम आदमी पार्टी के नेताओं और दिग्विजय सिंह जैसे अन्य विपक्षी सदस्यों ने एक सोची-समझी योजना के तहत 13 अप्रैल को जस्टिस शर्मा की अदालत में हुई केजरीवाल की पेशी का वीडियो बनाया। दावा है कि इस वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाकर न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश की गई। याचिकाकर्ता ने इसे एक गंभीर साजिश बताते हुए अदालत से गुजारिश की है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति SIT बनाई जाए।