
— कारीगर-आधारित आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से सतत आजीविका को बढ़ावा दिया
नई दिल्ली। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर वेदांता लिमिटेड ने सामुदायिक-आधारित पहलों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 8 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रभावित किया है। साथ ही 600 से अधिक कारीगरों का समर्थन किया और विभिन्न क्षेत्रों में 100 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं मंचों को बढ़ावा दिया।
भारत दुनिया की सबसे समृद्ध सांस्कृतिक विरासतों में से एक है, फिर भी कई पारंपरिक कला रूपों और कारीगर समुदायों को घटती आय और सीमित बाज़ार पहुंच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वेदांता लिमिटेड की पहलें इस अंतर को दूर करने और विरासत को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने का लक्ष्य रखती हैं। ये प्रयास सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी), विशेष रूप से एसडीजी 8 (सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास) और एसडीजी 11 (सतत शहर और समुदाय) में योगदान देते हैं। यह सांस्कृतिक संरक्षण पहल तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है—लुप्त होती कला और परंपराओं का संरक्षण एवं पुनर्जीवन, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के माध्यम से आजीविका के अवसर सृजित कर स्थायी आय सुनिश्चित करना, तथा कारीगरों को राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों से जोड़कर बाज़ार तक उनकी पहुँच और पहचान बढ़ाना।
साउरा पेंटिंग, ढोकरा शिल्क व कोसा सिल्क पर कर रहा काम
ओडिशा, राजस्थान, असम और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में वेदांता लिमिटेड साउरा पेंटिंग (प्रकृति और सामुदायिक जीवन को दर्शाने वाली जनजातीय भित्ति कला), ढोकरा शिल्प (प्राचीन लॉस्ट-वैक्स धातु ढलाई), कोसा सिल्क बुनाई (छत्तीसगढ़ की जीआई-टैग विरासत वस्त्र), अज्रख ब्लॉक प्रिंटिंग, बांस शिल्प और लोक रंगमंच जैसी विविध कला विधाओं को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। इन कला रूपों को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल, जयगढ़ हेरिटेज फेस्टिवल, उदयपुर वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल, कलाहांडी उत्सव, चैती महोत्सव आदि प्रमुख सांस्कृतिक मंचों पर प्रदर्शित किया गया है, जिससे इनकी पहचान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और कारीगर समुदायों को सीधे बाज़ार तक पहुँच बनाने में मदद मिली है। महिला-नेतृत्व वाली आजीविका पर विशेष ध्यान देते हुए वेदांता लिमिटेड ने सैकड़ों महिला कारीगरों को हैंडलूम, सिल्क, टेराकोटा और जूट आधारित शिल्प में कौशल विकास के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में सक्षम बनाया है।
इस क्षेत्र में निवेश भी हो रहा
सांस्कृतिक अवसंरचना और बड़े स्तर पर विरासत संरक्षण में भी निवेश कर रही है। सामुदायिक स्थानों जैसे हॉल, मंदिर और कीर्तन मंडपों को सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है, वहीं राजस्थान में ₹85 करोड़ की विरासत कॉरिडोर साझेदारी के माध्यम से संरक्षण, पर्यटन और समुदाय से जुड़े विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर अपनी सांस्कृतिक भागीदारी को आगे बढ़ाते हुए वेदांता लिमिटेड नगोमा और क्वाचा म्यूजिक अवॉर्ड्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों का समर्थन करती है, जो भारत से परे भी कलात्मक अभिव्यक्ति का उत्सव मनाते हैं।
Published on:
22 Apr 2026 02:27 pm
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
