
नई दिल्ली। देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले आम जनता और मिठाई कारोबारियों के लिए राहत भरी खबर आई है। दशहरा और दिवाली के दौरान बाजारों में चीनी की किल्लत न हो और यह लोगों को किफायती दामों पर उपलब्ध हो, इसके लिए सरकार और चीनी उद्योग ने मिलकर पूरी तैयारी कर ली है। थोक बाजारों में चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में खुदरा यानी रिटेल दामों पर देखने को मिलेगा।
इण्डियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि थोक यानी एक्स-मिल स्तर पर चीनी की दरों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक का सुधार और कमी आ चुकी है। वर्तमान में पूरे भारत में चीनी का औसत एक्स-मिल भाव घटकर लगभग 4,450 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया है। थोक कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट के बाद अब देश भर के खुदरा बाजारों में भी कीमतें धीरे-धीरे कम होने लगी हैं।
अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब मिलों या थोक मंडी में भाव गिरते हैं, तो दुकानों तक सस्ती चीनी पहुंचने में देरी क्यों होती है? इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बल्लानी ने बताया कि एक्स-मिल दरों में होने वाले बदलाव का असर आम ग्राहक की जेब तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है। सप्लाई चेन की इस व्यवस्था में थोक व्यापारी, वितरक और स्थानीय दुकानदारों के पास पहले से रखा स्टॉक खत्म होने और नए कम दाम वाले माल के बाजार में उतरने के बीच एक 'टाइम लेग' (समय का अंतर) होता है।
उन्होंने कहा कि अब थोक कीमतें काफी हद तक नियंत्रित हो चुकी हैं, इसलिए अगले कुछ हफ्तों में रिटेल काउंटर पर भी चीनी और सस्ती हो जाएगी। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य यही है कि त्योहारों के इस बड़े सीजन में मिठाइयों की मिठास पर महंगाई का साया न पड़े। उपलब्धता और दामों दोनों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि त्योहारी मांग के बावजूद कीमतें पूरी तरह नियंत्रण में रहें।