कंपनी के कर्मचारी के साथ मिलकर सारा पैसा एक फर्जी कंपनी के खाते में धीरे-धीरे ट्रांसफर कर दिया।
Gurugram crime गुरुग्राम पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक बड़े कॉर्पोरेट घोटाले का खुलासा करते हुए फरीदाबाद निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए युवक पर आरोप है कि उसने कंपनी के अंदरूनी कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके फर्जी वेंडर और नकली बिलों के जरिए करीब 18.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी कर ली। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान 37 वर्षीय गौरव ढींगरा के रूप में हुई है, जो एनआईटी फरीदाबाद का रहने वाला है। आरोपी बीबीए पास है। गुरुवार को पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर लिया। इसके खिलाफ सेक्टर-37 के थाने कार्यवाही की जा रही है। इसी थाने में मई 2025 में कावासाकी रोबॉटिक्स प्राईवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि ने दर्ज कराई थी। कंपनी गुरुग्राम के खांडसा क्षेत्र में स्थित है और रोबोटिक्स व ऑटोमेशन सेवाएं प्रदान करती है।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच कंपनी के कुछ कर्मचारियों ने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए काल्पनिक वेंडर तैयार किए। इसके बाद फर्जी इनवॉइस बनाकर बिना किसी वास्तविक सेवा के करोड़ों रुपये अपने और अपने सहयोगियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। हेराफेरी बहुत ही शातिराना ढंग से की गई थी लेकिन तकनीकी जांच में इनकी परतें खुल गई। तकनीकी सहायता और पुलिस डाटाबेस की मदद से संदिग्ध लेन-देन का पता लग गया। पुलिस के मुताबिक कुल 18 करोड़ 50 लाख 47 हजार 513 रुपये ढींगरा एंटरप्राइजेज से जुड़े बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए।
जब पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि, गौरव ढींगरा ने कंपनी के कर्मचारी लविश के साथ मिलकर ढींगडा एंटरप्राइज नाम से एक फर्जी फर्म बनाई थी। इसके लिए तीन बैंक खाते खुलवाए गए। लविश ने कंपनी में वेंडर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कराई जिससे भुगतान सीधे फर्जी खातों में जाने लगा। पुलिस जांच एक हैरान कर देने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि इस मामले में मास्टरमाइंड को महज पांच लाख रुपये ही मिल सके। गिरफ्तार आरोपी को पुलिस ने अदालत में पेश किया और इसकी दो दिन की रिमांड मांगी। पुलिस ने तर्क दिया है कि विस्तार से पूछताछ करने पर कुछ और खुलासे हो सकते हैं।