भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि लोग कोरोना नियमों का सख्ती से पालन नहीं कर रहे हैं।
नई दिल्ली। पिछले दो सालों से पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इस महामारी के चलते दुनियाभर में अब तक 52 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं अब कोरोना का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन सामने आया है, जो कुछ ही दिनों में दुनिया के कई देशों में फैल चुका है। ओमिक्रॉन को लेकर दुनियाभर में खौफ का माहौल है, वहीं भारत में इस नए वेरिएंट के बावजूद लोगों में कोरोना का कोई डर नहीं है। दरअसल, स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक हैरान कर देने वाली बात कही है। मंत्रालय का कहना है कि देश में लोग कोरोना नियमों में लापरवाही बरत रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेट्री लव अग्रवाल और नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी के पॉल ने कोविड प्रोटोकॉल के पालन में ढिलाई बरते जाने पर चिंता जताई है।
कोरोना नियमों का नहीं हो रहा पालन
उन्होंने बताया कि मास्क का प्रयोग भारत में लगभग 60 फीसदी के स्तर पर चला गया है जो फरवरी 2021 का स्तर था। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका में पाया गया कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट तेजी से दुनियाभर में फैल रहा है। अब तक 20 से अधिक देशों में यह नया वेरिएंट फैल चुका है। भारत में भी इस वेरिएंट के कई मामले सामने आ चुके हैं। तेजी से बढ़ते मामलों के चलते भारत सरकार चिंतित है। सरकार ने लोगों को नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। बावजूद इसके लोग कोरोना नियमों का पालन करने में ढील दिखा रहे हैं।
गनीमत यह है कि भारत में अभी तक ओमिक्रॉन के किसी गंभीर मामले की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन कोरोना नियमों के प्रति लोगों की लापरवाही ने स्वास्थ्य मंत्रालय हैरान है। मंत्रालय का कहना है कि अभी कुछ महीनों पहले ही देश में कोरोना की दूसरी लहर में हजारों लोगों की मौत हुई है। इसके बावजूद लोग कोरोना नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हम उसी स्थिति में आ गए हैं जैसी स्थिति कोरोना की दूसरी लहर के शुरुआत में थी। साथ ही उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग में कमी पर भी चिंता जताई। मंत्रालय का कहना है कि उन्होंने कोविड के मामले कम हुए हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि संक्रमण का खतरा पूरी तरह से खत्म हो गया है। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी ओमिक्रॉन को लेकर चिंता जताई है। WHO का कहना है कि ओमिक्रॉन को लेकर हमें आने वाली चुनौतियों से तैयार रहने की जरूरत है।