
Delhi Liquor Case:दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 20 अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को इन सभी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए "अंतिम अवसर" दिया है।
दरअसल, ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में आरोपियों को डिस्चार्ज (बहाल) करते समय जांच एजेंसी (ED) के खिलाफ कुछ प्रतिकूल टिप्पणियां (Adverse Remarks) की थीं। ED ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि निचली अदालत द्वारा एजेंसी के कामकाज पर की गई इन तीखी टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा दिया जाए (Expunge किया जाए)।
दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान बताया कि 10 मार्च को ही पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों से इस मामले में जवाब मांगा गया था, लेकिन अब तक केवल दो आरोपी अभिषेक बोइनपल्ली और विनोद चौहान ने ही अपना जवाब दाखिल किया है। बाकी 21 आरोपियों ने अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की थी। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने कहा कि 19 मार्च को पहले ही समय दिया जा चुका है, इसलिए अब 22 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का यह आखिरी मौका है, जिसके बाद मामले की मेरिट पर सुनवाई शुरू की जाएगी।
कथित शराब नीति घोटाले में ED ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगाए हैं। जहां एक ओर 'आप' नेता इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं, वहीं जांच एजेंसी का तर्क है कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां अनुचित थीं और उन्हें हटाया जाना न्यायसंगत है। अब सबकी नजरें 22 अप्रैल पर टिकी हैं, जब अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों को अदालत के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।