JNU Violence:परिसर में सोमवार देर रात छात्रों के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें कई छात्रों के घायल होने की खबर है। आरोप है कि 300-400 नकाबपोश लोगों की भीड़ स्कूलों और स्टडी रूम तक पहुंची और छात्रों को जबरन बाहर निकाला गया।
JNU Violence: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में एक बार फिर सोमवार की देर रात जमकर बवाल हुआ। छात्रों के दो गुटों में हिंसक झड़प भी हुई, जिसमें बताया जा रहा है कि कई छात्र घायल हो गए हैं। वहीं, आरोप लग रहे हैं कि नकाबपोश 300-400 लोगों की भीड़ स्कूलों और स्टडी रूम तक पहुंची और छात्रों को जबरन बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
आपको बता दें कि एएनआई से बातचीत में जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े वैभव मीणा ने आरोप लगाया कि पिछले 7-8 दिनों से परिसर में लेफ्ट विंग की हड़ताल चल रही है। उनका कहना है कि देर रात जिस तरह का भय और अराजकता फैलाई गई, उससे हालात बेकाबू हो गए। आरोप है कि नकाबपोश 300-400 लोगों की भीड़ स्कूलों और स्टडी रूम तक पहुंची और छात्रों को जबरन बाहर निकाल दिया। वैभव मीणा के मुताबिक, विजय नामक छात्र पर 100-150 लोगों ने मिलकर हमला किया। उन्होंने दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाते हुए इस पूरी घटना की कड़ी निंदा की।
जानकारी के अनुसार, छात्र संगठनों के बीच मारपीट रात करीब 1:30 बजे शुरू हुई, जो लगभग 3 बजे तक चली। आरोप है कि इस दौरान वामपंथी छात्रों के एक समूह ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों को निशाना बनाया। हालात इतने बिगड़ गए कि कई छात्र जहां-तहां छिपने को मजबूर हो गए।
आरोप है कि हमलावर छात्रों को ढूंढ-ढूंढ कर पीटा गया। जान बचाने के लिए कुछ छात्र झाड़ियों में छिपे, तो कुछ कैंपस के घने जंगल की ओर भागते नजर आए। एबीवीपी से जुड़े छात्रों का दावा है कि वे केवल एक प्रदर्शन को देखने पहुंचे थे, तभी एक समूह ने उन्हें घेर लिया और लात-घूंसों, बेल्ट तथा ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ हमलावरों के पास धारदार वस्तुएं भी थीं, जिससे कैंपस में अफरा-तफरी मच गई। मारपीट में कई छात्रों के घायल होने और कुछ की तबीयत बिगड़ने की सूचना है। खुद को सुरक्षित रखने के लिए छात्र हॉस्टलों और परिसर के अलग-अलग हिस्सों में छिपते दिखाई दिए।
घटना से जुड़े कुछ वीडियो में एक सुरक्षाकर्मी कर्मी भी नजर आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि लंबे समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रहने के बावजूद हिंसा रोकने के ठोस प्रयास नहीं किए गए। छात्रों का कहना है कि न तो सुरक्षा सुरक्षाकर्मियों को स्पष्ट निर्देश मिले और न ही प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।