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दुर्लभ बीमारी से जूझ रही 3 साल की बच्ची को नहीं मिलेगी सरकारी मदद? इलाज के खर्च पर दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र का विरोध

Delhi High Court : केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर LRBA डेफिसिएंसी से पीड़ित 3 साल की बच्ची को वित्तीय सहायता देने से मना कर दिया है, क्योंकि यह बीमारी NPRD 2021 की 63 अधिसूचित बीमारियों की सूची में नहीं है।

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गोले में बीमार बच्ची की प्रतीकात्मक फोटो

RBA Deficiency Treatment Central Government: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया है कि 'एलआरबीए डेफिसिएंसी' नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित एक तीन साल की बच्ची 'राष्ट्रीय दुर्लभ बीमारी नीति (NPRD), 2021' के तहत वित्तीय सहायता पाने की हकदार नहीं है। सरकार का तर्क है कि यह बीमारी वर्तमान में योजना के अंतर्गत आने वाली अधिसूचित दुर्लभ बीमारियों की सूची में शामिल नहीं है। बता दें कि यह दलील केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अदालत में दायर एक हलफनामे में दी गई है। यह हलफनामे बच्ची के पिता और प्राकृतिक अभिभावक द्वारा दायर एक रिट याचिका के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार को बेटी के इलाज के लिए एनपीआरडी-2021 के तहत वित्तीय सहायता मंजूर करने और जारी करने का निर्देश देने की मांग की थी।

लाख रुपए की सहायता देने से केंद्र का इनकार

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कहा है कि राष्ट्रीय दुर्लभ बीमारी नीति (NPRD), 2021 के तहत पात्र मरीजों को अधिकतम 50 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है, लेकिन यह लाभ केवल नीति के तहत अधिसूचित 63 दुर्लभ बीमारियों तक ही सीमित है। सरकार के अनुसार, एलआरबीए डेफिसिएंसी (LRBA Deficiency) नामक दुर्लभ आनुवंशिक प्रतिरक्षा विकार इस सूची में शामिल नहीं है, इसलिए तीन वर्षीय बच्ची योजना के पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करती। केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि सहायता से इनकार करना किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है, बल्कि मौजूदा नीति और कानून के तहत सभी मरीजों पर समान नियम लागू करने का परिणाम है। सरकार ने तर्क दिया कि वह अधिसूचित सूची से बाहर जाकर लाभ नहीं दे सकती और उसके फैसले में किसी तरह की मनमानी या अवैधता नहीं है।

'अदालत नीति में बदलाव नहीं कर सकती; स्वास्थ्य राज्यों का विषय'

राहत का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने कोर्ट में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि नीति के बाहर जाकर किसी बीमारी के लिए वित्तीय सहायता का निर्देश देना, वास्तव में सरकारी नीति में 'न्यायिक संशोधन' (Judicial Modification) करने जैसा होगा, जो कि पूरी तरह से कार्यपालिका (Executive) के विशेष अधिकार क्षेत्र में आता है। सूची में नई बीमारियों को जोड़ना एक नीतिगत निर्णय है और इसे न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से अनिवार्य नहीं किया जा सकता।

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