
Former SC Judge Katju on CJP: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं के पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने पार्टी के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका पर निशाना साधते हुए कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करके उन्होंने अपना सियासी करियर बर्बाद कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब जनता का उन पर भरोसा नहीं रहेगा और उनकी छवि ऐसे नेताओं की बन गई है, जो जेल जाने से डरते हैं।
एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में काटजू ने पीस बॉन्ड की तुलना अंग्रेजों के शासनकाल में क्रांतिकारियों से लिए जाने वाले माफीनामे से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह माफीनामा लिखकर देने वाले क्रांतिकारियों की जनता के बीच छवि प्रभावित होती थी, उसी तरह CJP नेताओं ने भी पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करके अपनी विश्वसनीयता खो दी है।
मार्कंडेय काटजू ने कहा कि सीजेपी के नेताओं ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करके खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। उन्होंने कहा कि जनता अब ऐसे नेताओं पर भरोसा नहीं करेगी। उनकी छवि आंदोलन से पीछे हटने वाले नेताओं की बन गई है।
काटजू ने ब्रिटिश शासन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय अंग्रेज आजादी की लड़ाई लड़ने वाले क्रांतिकारियों को गिरफ्तार करते थे। उन्हें जेल से रिहा करने के लिए माफीनामा लिखवाया जाता था। जो क्रांतिकारी माफीनामा लिखकर देते थे, उनकी जनता के बीच प्रतिष्ठा खत्म हो जाती थी। जनता ऐसे लोगों पर दोबारा विश्वास नहीं करती थी।
काटजू ने दावा किया कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद CJP नेताओं के सामने आंदोलन जारी रखने को लेकर कानूनी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। क्योंकि पीस बॉन्ड के जरिए नेताओं ने शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार का आश्वासन दिया है। यदि अब उन्होंने किसी भी प्रकार के आंदोलन में हिस्सा लिया, तो पुलिस इसे शांति भंग करने की कोशिश मानेगी। फिर उनके खिलाफ बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन की कार्रवाई हो सकती है।
काटजू ने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका पहले करीब एक सप्ताह तक जेल में रहे थे, लेकिन अब दोबारा आंदोलन करने पर उन्हें कई महीनों तक जेल में रहना पड़ सकता है। इसी डर से सीजेपी के नेता आंदोलन करने से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि सीजेपी अब खत्म हो चुकी है और पार्टी की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है।
दरअसल, अक्टूबर महीने में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था।
इसके बाद 11 अक्टूबर को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने तीनों नेताओं को एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया था। इसके लिए प्रत्येक की ओर से 50 हजार रुपये का जमानती बॉन्ड जमा किया गया था।
हालांकि, इसके कुछ दिन बाद 14 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर प्रतिबंधों का उल्लंघन करने और पीस बॉन्ड की शर्तें तोड़ने के आरोप में दोबारा हिरासत में लिया गया। दोनों को बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। दोनों एक हफ्ते तक तिहाड़ जेल में बंद थे, फिर लिखित आश्वासन के बाद उन्हें जमानत मिली।