नई दिल्ली

‘वोट देने का अधिकार खतरे में’, पूर्व SC जज रोहिंटन नरीमन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जताई चिंता

Rohinton Nariman ECI: पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार लोकतंत्र का दिल है और सुप्रीम कोर्ट को चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।
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Rohinton Nariman ECI
पूर्व SC जज रोहिंटन नरीमन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जताई चिंता, फोटो सोर्स- ANI

Justice Rohinton Nariman: पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 27 सितंबर को दिए अपने भाषण में उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाने वाला नागरिकों का वोट देने का अधिकार आज गंभीर खतरे में है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान और अगर मैं कहूं तो हमारे लोकतंत्र का दिल, जो वोट देने का अधिकार है, वह आज बहुत बड़े खतरे में है।

90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का किया जिक्र

जस्टिस नरीमन ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के प्रभावित होने का जिक्र किया। उनके अनुसार करीब 90 लाख मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया। उन्होंने कहा कि इनमें से करीब 22 लाख लोगों ने अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील की। चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान करीब 27.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में आए थे और 22.21 लाख ने अपने नाम फिर शामिल कराने के लिए अपील की थी।

93 फीसदी मामलों में मतदाताओं के पक्ष में फैसला

जस्टिस नरीमन ने कहा कि जिन करीब एक लाख अपीलों पर फैसला हुआ, उनमें लगभग 93 फीसदी मामले मतदाताओं के पक्ष में गए। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भी 16 सितंबर तक तय किए गए मामलों में करीब 93 फीसदी में मतदाताओं को फिर से सूची में शामिल किया गया। जस्टिस नरीमन ने इसे लेकर सवाल उठाया कि यदि बड़ी संख्या में अपीलों में मतदाताओं को राहत मिली, तो इतनी बड़ी संख्या में लोगों को पहले ही मतदाता सूची से बाहर क्यों किया गया।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर भी सवाल

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज ने 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानूनी बदलावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने Anoop Baranwal मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुझाए गए चयन पैनल का जिक्र किया, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे। उन्होंने कहा कि बाद में कानून में बदलाव कर मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री को चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया, जिससे उनके अनुसार कार्यपालिका के प्रभाव का सवाल फिर खड़ा हो गया।

ECI के भीतर मतभेदों का भी किया जिक्र

जस्टिस नरीमन ने उन रिपोर्टों का भी हवाला दिया जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ फैसलों को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी। हालिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कुछ फैसलों पर आपत्ति जताए जाने का उल्लेख हुआ है।

‘सुप्रीम कोर्ट को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए’

जस्टिस नरीमन ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करने और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा चुनावी प्रक्रिया में लोगों के भरोसे को सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ऐसी स्थिति में नहीं होना चाहिए कि वह ठीक से काम करे या उसके कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हों। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश या उनके नामित व्यक्ति को शामिल करने वाली संतुलित व्यवस्था की जरूरत पर भी जोर दिया।

Updated on:
04 Oct 2026 05:17 pm
Published on:
04 Oct 2026 05:16 pm
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