
KC Venugopal: विदेशी योगदान नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2026 की जांच में लगी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की कार्यशैली को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर समिति की मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अति संवेदनशील कानून की जांच के लिए जिस व्यापक परामर्श की जरूरत थी, उसमें जल्दबाजी दिखाई जा रही है।
सोशल मीडिया पर पत्र साझा करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिक समाज के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा असर डालता है। JPC का मुख्य काम था कि वह हर संबंधित वर्ग से सलाह ले और कानून से जुड़ी चीजों की गहराई से जांच करें। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर समिति में निष्पक्ष और व्यापक चर्चा नहीं होती, तो संसदीय प्रक्रियाओं का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला गुहार लगाई है कि समिति को पर्याप्त समय दिया जाए। उन्होंने गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाओं, कानूनी विशेषज्ञों के साथ-साथ राज्य सरकारों से भी लिखित और मौखिक सुझाव लेने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि विधेयक की धारा-दर-धारा समीक्षा के लिए समिति सदस्यों को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए ताकि कानून त्रुटिहीन बना रहें।
12 अगस्त को गठित 31 सदस्यीय इस JPC को संसद के शीतकालीन सत्र से पहले ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। हालांकि, विपक्षी दलों का तर्क है कि जनता और संगठनों को अपनी बात रखने के लिए दिया गया 7 दिनों का समय बहुत कम है। DMK सांसद पी. विल्सन समेत कई अन्य सदस्यों ने मांग की है कि हितधारकों से सुझाव मांगने की समय सीमा कम से कम चार हफ्ते बढ़ाई जाए और 12 अक्टूबर को तय बैठक को भी आगे खिसकाया जाए।
समिति इस संबंध में अधिकारियों और विशेषज्ञों से शुरुआती दौर की बातचीत कर चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समय देश में 14,440 सक्रिय FCRA खाते हैं।