नई दिल्ली

मनी लॉन्ड्रिंग केस: दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे कथित नागा विद्रोही मसानसोंग, आधी सजा जेल में काटने का दिया हवाला

Delhi Court News: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट ने मसानसोंग की जमानत की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जांच एजेंसी ED (प्रवर्तन निदेशालय) को नोटिस थमा दिया है और पूछा है कि इस मामले में अभी क्या चल रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने जेल प्रशासन से मसानसोंग का जेल रिकॉर्ड भी मांगा है।
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Delhi High Court
पैसों की हेराफेरी (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोप में फंसे कथित नागा विद्रोही मसानसोंग एओ को दिल्ली हाई कोर्ट से थोड़ी राहत मिली है। फोटो सोर्स -ANI

Delhi High Court: मनी लॉन्ड्रिंग (पैसों की हेराफेरी) के आरोपों में घिरे कथित नागा विद्रोही मसानसोंग एओ को दिल्ली हाई कोर्ट से एक नई उम्मीद जगी है। हाई कोर्ट ने मसानसोंग की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया है। साथ ही अदालत ने इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है।

मामले की सुनवाई जस्टिस प्रतीक जालान की बेंच कर रही है। कोर्ट ने जेल प्रशासन से मसानसोंग का जेल रिकॉर्ड (नॉमिनेट रोल) भी पेश करने को कहा है। बता दें कि इसी साल मार्च में निचली अदालत ने मसानसोंग की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

वकील की दलील: 'आधी सजा तो जेल में ही काट चुके'

मसानसोंग की तरफ से पैरवी कर रही वकील शुभी श्रीवास्तव ने अदालत में कई मजबूत दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि मसानसोंग साल 2022 से ही जेल में बंद हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में कानूनन जितनी अधिकतम सजा हो सकती है, मसानसोंग उसका आधा समय (साढ़े तीन साल) पहले ही कस्टडी में बिता चुके हैं। ऐसे में उन्हें जेल में रखना ठीक नहीं है।

वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि इसी मामले की एक अन्य आरोपी अलेमला जामिर को कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। इतना ही नहीं, केस के एक और आरोपी को तो पुलिस ने कभी गिरफ्तार ही नहीं किया और बिना गिरफ्तारी के ही उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। ऐसे में मसानसोंग के साथ भेदभाव क्यों?

90 साल के बूढ़े माता-पिता का दिया हवाला

अदालत के सामने मसानसोंग की पारिवारिक स्थिति का भी जिक्र किया गया। वकील ने बताया कि मसानसोंग की उम्र 49 साल हो चुकी है। नागालैंड के एक दूरदराज के गांव में उनके 90 साल के बुजुर्ग माता-पिता रहते हैं। बूढ़े होने के कारण वे इतनी दूर दिल्ली आकर अपने बेटे से मिल भी नहीं सकते। याचिका में यह भी भरोसा दिया गया है कि अगर मसानसोंग को जमानत मिलती है, तो वह कोर्ट की हर शर्त को मानने के लिए तैयार हैं।

आतंकवाद विरोधी कानून के तहत दर्ज हुआ केस

मामले की शुरुआत दिसंबर 2019 में हुई थी, जब अलेमला जामिर के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस केस को अपने हाथ में ले लिया।

इसी जांच के दौरान मसानसोंग को गिरफ्तार किया गया, जो फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में हैं। बाद में साल 2021 में इस मामले में पैसों के अवैध लेनदेन की बात सामने आने पर ईडी (ED) ने भी एंट्री मारी और मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर 2022 में मसानसोंग को अपनी कस्टडी में ले लिया था।

Updated on:
09 Jul 2026 02:07 pm
Published on:
09 Jul 2026 02:07 pm
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