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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सोशल मीडिया पर फर्जी पोस्ट करने वालों की अब खैर नहीं!

Abhishek Sharma: दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की पहचान, तस्वीरों और व्यक्तित्व अधिकारों के कथित दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। AI और डीपफेक के जरिए बनाए गए फर्जी कंटेंट को लेकर कोर्ट ने आरोपियों को समन जारी किया, जबकि कई विवादित लिंक पहले ही हटाए जा चुके हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
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क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की प्राइवेसी पर दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख: फोटो सोर्स-ANI

Delhi High Court: भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की पहचान और तस्वीरों का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उन सभी लोगों और प्लेटफॉर्म्स को समन जारी किया है जो क्रिकेटर के 'पर्सनैलिटी राइट्स' का उल्लंघन कर रहे थे। हालांकि, इस मामले में एक राहत भरी खबर भी आई है कि शिकायत के बाद इंटरनेट से कई आपत्तिजनक और विवादित लिंक्स को हटा दिया गया है।

अदालत का सीधा एक्शन और सोशल मीडिया पर नजर

जस्टिस ज्योति सिंह की कोर्ट में हुई इस सुनवाई के दौरान साफ किया गया कि आरोपियों को सोशल मीडिया हैंडल्स, उनके पतों और अन्य कानूनी माध्यमों के जरिए नोटिस भेजे जाएं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की तरफ से पैरवी कर रहे वकील गौरव बहल ने कोर्ट को बताया कि कानूनी कदम उठाने के बाद इंटरनेट से कई विवादित पोस्ट और लिंक्स हटाए जा चुके हैं। वहीं, फेसबुक और इंस्टाग्राम का संचालन करने वाली कंपनी 'मेटा' के वकील वरुण पाठक ने कोर्ट में कहा कि अब उनके प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे केवल दो ही लिंक बचे हैं, जिन पर काम चल रहा है।

डीपफेक और AI तकनीक से हुआ था खिलवाड़

दरअसल, यह पूरा मामला अभिषेक शर्मा के नाम और चेहरे की प्राइवेसी से जुड़ा हुआ है। इंटरनेट पर कुछ लोगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल एडिटिंग का गलत इस्तेमाल करके क्रिकेटर की फर्जी तस्वीरें और भ्रामक कंटेंट पोस्ट कर दिया था। इस पर अभिषेक के वकील ने मांग की थी कि जो लोग भी इन लिंक्स को शेयर कर रहे हैं या आगे बढ़ा रहे हैं, उन पर तुरंत पाबंदी लगाई जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि नियमों के मुताबिक पहले सभी आरोपियों तक कानूनी नोटिस (समन) पहुंचना जरूरी है, उसके बाद ही आगे की रोक पर कोई फैसला लिया जाएगा।

क्या है पर्सनैलिटी राइट्स और कंपनियों की चुनौती?

इस मामले ने एक नई बहस को भी जन्म दे दिया है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में यह माना था कि इंटरनेट के इस दौर में किसी की बदनामी करने (मानहानि) और उसके निजी अधिकारों के हनन के बीच बहुत मामूली सा अंतर रह गया है। दूसरी तरफ, मेटा कंपनी का कहना था कि हर खराब पोस्ट को प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। कंपनी ने दलील दी कि अगर टेक कंपनियों को लगातार नए-नए लिंक ढूंढकर हटाने को कहा जाएगा, तो यह 'पूरे इंटरनेट की सफाई' करने जैसा एक अंतहीन काम बन जाएगा।

अभिषेक शर्मा का यह मामला कोई अकेला केस नहीं है। आजकल AI और डीपफेक के जरिए नामी हस्तियों के चेहरे और आवाज का गलत इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट में इस समय ऐसे कई मामले पेंडिंग हैं। इस ताजा कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि सोशल मीडिया की आड़ में किसी सेलिब्रिटी की निजी जिंदगी और इमेज से खिलवाड़ करने वालों पर अब कानूनी शिकंजा कसना तय है।