Aravali Hills: अरावली पहाड़ियों को लेकर मोहन भागवत ने चातावनी दी है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन नहीं होने पर उन्होंने चिंता जताई है।
Aravali Hills: देश में विकास और पर्यावरण को लेकर चल रही बहस के बीच में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपना बयान दिया है। बुधवार को वह रायपुर एम्स में युवा संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। इस संवाद में उन्होंने युवाओं के जीवन को लेकर बहुत सी बातों पर प्रकाश डाला और साथ ही उन्होंने देश में चल रहे अंधाधुंध विकास को लेकर चिंता जताई और अरावली पहाड़ी वाले विवाद पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच में संतुलन जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक देश में ऐसा मॉडल नहीं बन पाया है, जिससे पर्यावरण और विकास दोनों एक साथ आगे बढ़ सकें।
मोहन भागवत ने चेतावनी देते हुए कहा कि अरावली पहाड़ियां सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं हैं। वह पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण को संतुलित रखने वाली रीढ़ है, अगर विकास के नाम पर इन प्राकृतिक ढांचों को नुकसान पहुंचाया जाएगा तो आने वाले समय में पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि माना विकास जरूरी है, लेकिन वह तभी फायदेमंद होगा जब विकास प्रकृति को साथ लेकर चले। उन्होंने युवाओं से बात करते हुए कहा कि नौकरी, करियर और आधुनिक सुविधाएं सब जरूरी हैं, लेकिन इन सब सुविधाओं के साथ पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाना बहुत जरूरी है।
मोहन भागवत ने कहा कि आज चाहे बांग्लादेश का मौजूदा विषय हो या समाज में नई पीढ़ी को लेकर समस्या हो, किसी भी समस्या का समाधान सिर्फ चर्चा से नहीं होने वाला है। इन सभी समस्याओं के लिए सामूहिक रूप से उपाय निकालने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जितने भी हिंदू हैं, सब एक ही हैं। उन्होंने समाज, जाति और भाषा के आधार पर भेदभाव को खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि एकता ही हमारी असली ताकत है। मंदिर, श्मशान जैसी पब्लिक जगहों के गेट सबके लिए समान रूप से खुले होने चाहिए। साथ ही समाज में आपसी रिश्ते और एक-दूसरे के घर आने-जाने की परंपरा को और मजबूत करने पर भी जोर दिया।
मोहन ने संवाद में आजकल युवाओं में नशे की बढ़तीआदत को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है। युवा अंदर से अकेला महसूस करते हैं और इस वजह से वह नशे करने को ज्यादा महत्व देते हैं। इसके पीछे का कारण उन्होंने परिवार के साथ बातचीत कम होने और रिश्ते कमजोर होना बताया। उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन परिवार के साथ अच्छे से समय बिताना चाहिए या बातचीत करनी चाहिए, जिससे रिश्ते मजबूत होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आदेश देने की जगह आपसी सहमति से काम करने की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण पर मोहन भागवत ने जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा सिर्फ सरकार के नियमों से ही नहीं होती है। इसकी शुरुआत हम अपने जीवन में कुछ बदलाव करके भी कर सकते हैं, जैसे- बारिश के पानी को स्टोर करना, प्लास्टिक के उपयोग से जितना हो सके बचना और पौधे लगाना। इन सब आदतों को अगर सभी लोग अपने जीवन में अपना लें तो पर्यावरण संरक्षण संभव है। इसके अलावा उन्होंने आत्मनिर्भरता पर भी जोर देते हुए कहा कि हमें अपने देश के प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि संविधान में जो नियम कानून पहले से तय किए जा चुके हैं, उनकी अपने जीवन में पालना करना बहुत जरूरी है।