
सेवा, पेंशन और जमीन के मुआवजे सहित चार प्रमुख तरह के मामले हैं बढ़ती सरकारी मुकदमेबाजी के प्रमुख कारण
सरकारी मुकदमों के प्रबंधन के लिए आयोजित हुआ सम्मेलन
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार अदालतों में बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए सरकारी मुकदमेबाजी को कम करने के लिए कमर कस रही है। इसके लिए यहां केन्द्रीय सचिवों और विधि विभाग के विधि अधिकारियों का राष्ट्रीय सम्मेलन भारत मंडपम में आयोजित किया गया। इसका विषय था “सरकारी मुकदमेबाजी के कुशल और प्रभावी मैनेजमेंट”। सम्मेलन में सर्विस, पेंशन और रोज़गार के मामले, इंफ्रास्ट्रक्चर, मुआवज़ा और अनुबंध से जुड़े विवाद व राजकोषीय, कराधान और राजस्व के मामले तथा विनियामक, प्रवर्तन और अनुपालन से जुड़ी मुकदमेबाजी के चार मुख्य विषयों पर मुकदमेबाजी के हालात पर चर्चा की गई ।
सबके साथ एक जैसा कानून लागू नहीं होने से होते हैं सेवा-पेंशन जैसे मामले
चर्चा के दौरान माना गया कि सरकारी अधिकारियों की ओर से कानूनी स्थिति को एक जैसा लागू न करने के कारण बार-बार सर्विस लिटिगेशन, काउंटर एफिडेविट फाइल करने से पहले सही सलाह-मशविरा न करना, अलग-अलग मंत्रालयों की अलग-अलग राय लेना, विभाग और पैनल काउंसल के बीच तालमेल की कमी, और सोचे-समझे नीतिगत फैसले के बजाय डिफ़ॉल्ट रिएक्शन के तौर पर अपील फाइल करने की आदत के कारण सरकारी मुकदमेबाजी बढ़ रही है। गौरतलब है कि भारत की अदालतों में बढ़ते मुकदमों के बोझ का एक कारण सरकारी मुकदमे भी हैं।
विभिन्न विभागों में तालमेल व मध्यस्थता के प्रयासों में कमी
सम्मेलन में इंन्फ्रास्ट्रक्चर और मुआवज़े के मामलों में, जमीन के मुआवजे के बढ़ते मुकदमे और ब्याज की देनदारियों, आर्बिट्रेशन अवॉर्ड में आम चुनौतियों, इंफ्रास्ट्रक्चर अनुबंध में तकनीकी मुश्किलों की वजह से कानूनी जांच ठीक से नहीं हो पाना, तकनीकी डिवीज़न और लीगल टीमों के बीच तालमेल का ठीक से न होना, और एडीआर और मुकदमे से पहले की मध्यस्थता का कम इस्तेमाल होने जैसी चिंताएं प्रकट की गईं। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता व विधि सचिव मौजूद रहे।
Published on:
02 Mar 2026 09:12 pm
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