Namo Bharat train: मेरठ से दिल्ली का सफर अब आसान होने वाला है। 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमो भारत ट्रेन का शुभारंभ करेंगे, जिससे यह दूरी महज 40 मिनट में तय होगी।
Namo Bharat train: मेरठ से दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। दरअसल, 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमो भारत ट्रेन का शुभारंभ करेंगे। जहां अब तक मेरठ से दिल्ली पहुंचने में घंटों का समय लगता था, वहीं यह सफर अब महज 40 मिनट में पूरा हो सकेगा। बताया जा रहा है कि इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। बीते शुक्रवार को NCRTC ने मीडिया के लिए इसका विशेष ट्रायल रन भी आयोजित किया था।
आपको बता दें कि मेरठ और एनसीआर के लिए 22 फरवरी का दिन बेहद खास होने वाला है। रविवार को पीएम मोदी नमो भारत रैपिड रेल को चलने के लिए हरी झंडी दिखा देंगे। नियमित संचालन के दौरान ट्रेन हर स्टेशन पर लगभग एक मिनट के लिए रुकेगी। इस तरह यह ट्रेन दिल्ली से मेरठ की दूरी करीब 55 मिनट में पूरी करेगी। शुक्रवार को जब इस ट्रेन का ट्रॉयल किया गया तो सराय काले खां से गाजियाबाद की दूरी करीब 15 मिनट में तय की और अगले 15 मिनट में मेरठ साउथ स्टेशन पहुंच गई। वहीं, इस ट्रेन के संचालन से दिल्ली से मेरठ के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी उम्मीद है।
शुक्रवार को जब इस ट्रेन को ट्रॉयल के लिए दौड़ाया गया तो बेगमपुल स्टेशन का नजारा बेहद मनमोहक देखने को मिला। जमीन से करीब 70 मीटर नीचे बने इस अंडरग्राउंड स्टेशन पर एक तरफ नमो भारत ट्रेन खड़ी थी, जबकि सामने मेरठ मेट्रो इंटरचेंज पूरी तरह तैयार नजर आया। फ्लोरोसेंट ग्रीन, ब्लू और ऑरेंज रंगों की थीम में सजी तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो को 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। बेगमपुल से मेरठ साउथ के बीच मेट्रो का सफर महज 10 मिनट में पूरा होगा।
ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से नमो भारत रैपिड रेल को एक मॉडल प्रोजेक्ट के तौर पर विकसित किया गया है। मेरठ साउथ से यात्री नमो भारत ट्रेन के जरिए सात स्टेशनों को पार करते हुए सीधे आनंद विहार तक पहुंच सकेंगे। आनंद विहार आरआरटीएस स्टेशन, आईएसबीटी और मेट्रो स्टेशन आपस में जुड़े होने के कारण यात्रियों को निर्बाध और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी।
82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में पर्यावरण को प्राथमिकता देते हुए स्टेशनों और डिपो की छतों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। इस परियोजना के तहत 15 मेगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से फिलहाल 5.5 मेगावॉट बिजली का उत्पादन शुरू हो चुका है। आने वाले समय में 110 मेगावॉट क्षमता का कैप्टिव सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिससे कुल बिजली जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा होगा। इससे हर वर्ष करीब 1.77 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है।