
Delhi Gymkhana Club: दिल्ली के सबसे पॉश और वीवीआईपी इलाकों में शुमार 'दिल्ली जिमखाना क्लब' पर बेदखली की तलवार लटक गई है। केंद्र सरकार ने क्लब को एक नोटिस जारी कर सफदरजंग रोड स्थित इस परिसर को खाली करने का आदेश दिया है। जानकारी के मुताबिक, क्लब की लीज बीती 22 मई को ही खत्म हो चुकी है। लीज खत्म होने के बाद भी परिसर पर बने रहने को सरकार ने पूरी तरह अनधिकृत (अवैध) माना है। इस संवेदनशील मामले पर अब अगली अहम सुनवाई आगामी 7 जुलाई को होने जा रही है।
लुटियंस दिल्ली के केंद्र में स्थित इस क्लब को यह नोटिस 'सार्वजनिक परिसर अधिनियम, 1971' के तहत थमाया गया है। सरकार की तरफ से भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने क्लब के प्रतिनिधियों को 7 जुलाई को हाजिर होने का फरमान सुनाया है, जहां उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। सरकार का इस पर साफ और कड़ा रुख है। अधिकारियों का कहना है कि यह जमीन देश की कीमती सार्वजनिक संपत्ति है, और सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह इसका इस्तेमाल किसी निजी आनंद के बजाय देश की भलाई और आम जनता के हितों से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं के लिए करे।
भूमि एवं विकास कार्यालय ने करीब एक महीने पहले ही दिल्ली जिमखाना क्लब को एक चिट्ठी भेजकर साफ कर दिया था कि अब इस 27.3 एकड़ की बेशकीमती जमीन की जरूरत रक्षा ढांचे को मजबूत करने और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कामों के लिए है। सरकार का तर्क है कि लीज के नियमों के मुताबिक, अगर कभी भी देश की सुरक्षा या जनहित के लिए इस जमीन की आवश्यकता पड़ती है, तो सरकार को इसे वापस लेने का पूरा कानूनी अधिकार है।
नोटिस में तीखे शब्दों में कहा गया है कि लीज खत्म होने और बार-बार हिदायत दिए जाने के बावजूद क्लब ने इस पर अपना कब्जा जमाए रखा। सरकार ने इसे जनहित के खिलाफ बताते हुए कहा कि इतनी मूल्यवान राष्ट्रीय संपत्ति पर इस तरह का अनधिकृत कब्जा और ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सरकार की योजना इस जमीन को आसपास की अन्य सरकारी जमीनों के साथ मिलाकर एक एकीकृत विकास योजना तैयार करने की है।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि साल 1928 में अंग्रेजों के जमाने में तत्कालीन 'इम्पीरियल जिमखाना क्लब' को यह जमीन लीज पर दी गई थी। आजादी मिलने के बाद इसका नाम बदलकर 'दिल्ली जिमखाना क्लब' कर दिया गया, जो दशकों तक दिल्ली के रसूखदारों, ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं का पसंदीदा ठिकाना बना रहा।
सरकार ने क्लब को 5 जून तक का समय देते हुए परिसर खाली करने को कहा था। इस कार्रवाई से बचने के लिए क्लब के सदस्यों ने तुरंत दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार की बेदखली की इस प्रक्रिया पर फिलहाल कोई अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत में सुनवाई के दौरान देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने साफ किया कि सरकार कानून के दायरे में रहकर ही पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी और किसी भी तरह की जल्दबाजी या जबरदस्ती नहीं की जाएगी। फिलहाल, सभी की निगाहें 7 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे इस आलीशान क्लब का भविष्य तय होगा।