
Delhi Parliament: देश की राजधानी दिल्ली से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। पीएम मोदी की अगुवाई में हुई इस मीटिंग में देश के सुरक्षा, विदेश और वित्त मामलों से जुड़े सबसे बड़े मंत्री शामिल हुए, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
संसद परिसर में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में मोदी कैबिनेट के कई सबसे वरिष्ठ और प्रमुख मंत्री शामिल हुए। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण विशेष रूप से मौजूद रहीं। मंत्रियों के अलावा, देश की सुरक्षा रणनीति में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी इस बैठक में मौजूद रहें।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा पश्चिम एशिया की मौजूदा नाजुक स्थिति और भारत की ऊर्जा व ईंधन आपूर्ति पर पड़ने वाले असर की समीक्षा करना था। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते से ही दूसरे देशों में जाता है, जो इस समय पूरी तरह बंद पड़ा है। इस रास्ते के बंद होने से इंटरनेशनल मार्केट में पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स की कमी हो गई है और उनकी कीमतें लगातार तेजी से बढ़ रही हैं।
इसके साथ ही समुद्र में कमर्शियल जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों ने संकट को और गहरा कर दिया है। इन हमलों में भारतीय नाविकों की जान जाना भारत सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर भारत सरकार ने अमेरिका और ईरान दोनों ही देशों के समक्ष कड़ा रुख अपनाते हुए मामला उठाया है।
दुनिया भर में भले ही तेल की कीमतें बढ़ रही हों जिससे भारत का खर्च बढ़ा है, लेकिन देश के लिए एक बहुत अच्छी खबर भी आई है। आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की औसत कीमत जो अप्रैल 2026 में 114.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, वह जुलाई 2026 (22 जुलाई तक) में घटकर 77.6 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। कीमतों में आई इस बड़ी कमी से भारतीय बाजार, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में महंगाई से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने संसद को बताया है कि इस संकट से निपटने और देश के बाजार को स्थिर रखने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। भारत ने अब किसी एक देश से तेल खरीदने के बजाय अलग-अलग देशों से तेल का इंतजाम करना शुरू कर दिया है, ताकि सप्लाई न रुके। साथ ही एडवांस बुकिंग करके देश में पहले से ही तेल का बफर स्टॉक तैयार कर लिया गया है। देश के किसानों को कोई तकलीफ न हो, इसके लिए खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को गैस की सप्लाई पक्की कर दी गई है, ताकि बाजार में खाद की कोई कमी न हो।
कारोबारियों और निर्यातकों को बढ़ते किराए और भारी बीमा खर्च से बचाने के लिए सरकार ने 'भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल राहत' नाम की एक नई योजना शुरू की है। इसके अलावा उद्योगों को राहत देने के लिए कुछ खास केमिकल्स पर लगने वाला टैक्स (कस्टम ड्यूटी) अस्थायी तौर पर हटा दिया गया है। कंपनियों को व्यापार में मदद देने के लिए पुरानी RoDTEP योजना के फायदे फिर से मिलने लगे हैं और ECLGS 5.0 के तहत बैंकों से आसानी से लोन दिलाने की व्यवस्था भी की गई है।