
जेएनयू की पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष और सीपीआई (एम) नेता आइशी घोष | फोटो सोर्स- ANI
JNU Student Leader: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष और वामपंथी नेता आइशी घोष को दिल्ली की एक अदालत से बड़ी राहत मिली है। राजधानी के बंगा भवन के सामने साल 2021 में हुए एक प्रदर्शन से जुड़े मामले में अदालत ने उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) को रद्द कर दिया है। यह राहत आइशी घोष के मजिस्ट्रेट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बाद मिली।
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट की जज विजया श्री राठौर ने इस मामले की सुनवाई की। जब आइशी घोष खुद अदालत के सामने हाजिर हुई, तो कोर्ट ने उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए उनके खिलाफ जारी वारंट को खत्म कर दिया। इससे पहले कोर्ट ने बुधवार को इस वारंट पर अस्थायी रोक लगाई थी और उन्हें अगली तारीख पर कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
यह अदालती राहत उस घटना के ठीक दो दिन बाद आई है, जब दिल्ली पुलिस इस वारंट को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय पहुंच गई थी। उस समय पुलिसकर्मियों और पार्टी नेताओं के बीच काफी तीखी बहस और टकराव देखने को मिला था। सीपीआई (एम) के सदस्यों का आरोप था कि आइशी घोष को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है क्योंकि वो दिल्ली में हुए कुछ अन्य प्रदर्शनों में भी शामिल रही थी।
यह पूरा विवाद 12 फरवरी 2021 को चाणक्यपुरी स्थित बंगा भवन के बाहर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। उस समय कोलकाता में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का विरोध कर रहे छात्र संगठनों और युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और कार्रवाई की थी। इसी कार्रवाई के विरोध में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में मोर्चा खोला था। दिल्ली पुलिस का आरोप था कि यह प्रदर्शन एक प्रतिबंधित क्षेत्र में किया गया, जहां धारा 144 लागू थी। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की, मुख्य सड़क को जाम कर दिया और पुलिस के बार-बार समझाने व स्पष्ट निर्देश देने के बावजूद वहां से नहीं हटे।
अदालत में आइशी घोष की ओर से पेश हुए वकील केएन जयशंकर और सुभाष चंद्रन केआर ने एक आवेदन दायर कर उनका पक्ष रखा। वकीलों ने दलील दी कि कुछ ऐसी मजबूरियां और जरूरी कारण आ गए थे, जिनकी वजह से आइशी घोष पिछली सुनवाइयों के दौरान कोर्ट नहीं आ सकी थीं। कोर्ट ने इन दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए वारंट रद्द करने का फैसला सुनाया।
Updated on:
30 Jul 2026, 1:22 PM IST
Published on:
30 Jul 2026, 12:51 PM IST
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