संसद परिसर में किया गया यह प्रदर्शन अपने तरीके को लेकर चर्चा में रहा। आमतौर पर राजनीतिक दल नारेबाजी, पोस्टर और तख्तियों के जरिए विरोध करते हैं, लेकिन इस बार विपक्षी सांसद दान पात्र को ही विरोध का माध्यम बनाकर सामने आए। उनका कहना था कि वे इसी जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि धार्मिक मामलों में जनता के विश्वास और पैसों का पूरा सम्मान होना चाहिए।