नई दिल्ली

संसद से सड़क तक साझा लड़ाई की आज होगी तैयारी, दिल्ली में जुटेंगे इंडिया ब्लॉक के 23 दल

लोकसभा चुनाव के दो साल बाद बदले हुए सियासी हालात के बीच विपक्षी इंडिया ब्लॉक एक बार फिर अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाने की तैयारी में है। सोमवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होने वाली ब्लॉक की बैठक में कई मुद्दों को लेकर संसद से सड़क तक सरकार के खिलाफ सियासी लड़ाई लड़ने की रणनीति तैयार होगी। बैठक में 23 दलों के शामिल होने की पुष्टि हुई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार बैठक का उद्देश्य केवल राजनीतिक समन्वय नहीं, बल्कि उन मुद्दों पर साझा रणनीति बनाना है जिन्हें विपक्ष लोकतंत्र, संविधान और आम जनता के हितों से जुड़ा मानता है। बैठक ऐसे समय हो रही है जब संसद का मानसून सत्र भी करीब है

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India Block Meeting

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के दो साल बाद बदले हुए सियासी हालात के बीच विपक्षी इंडिया ब्लॉक एक बार फिर अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाने की तैयारी में है। सोमवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होने वाली ब्लॉक की बैठक में कई मुद्दों को लेकर संसद से सड़क तक सरकार के खिलाफ सियासी लड़ाई लड़ने की रणनीति तैयार होगी। बैठक में 23 दलों के शामिल होने की पुष्टि हुई है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार बैठक का उद्देश्य केवल राजनीतिक समन्वय नहीं, बल्कि उन मुद्दों पर साझा रणनीति बनाना है जिन्हें विपक्ष लोकतंत्र, संविधान और आम जनता के हितों से जुड़ा मानता है। बैठक ऐसे समय हो रही है जब संसद का मानसून सत्र भी करीब है। विपक्षी दलों की कोशिश है कि संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार के खिलाफ एक समन्वित अभियान चलाया जाए।
सूत्रों के अनुसार बैठक में आगामी महीनों के राजनीतिक कार्यक्रमों, संयुक्त आंदोलनों और संसद में विपक्ष की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।

इन मुद्दों पर होगा मंथन

  1. मतदाता सूची पुनरीक्षण के जरिए लाखों लोगों को मतदान से वंचित किए जाने का आरोप।
  1. विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का मुद्दा।
  2. महंगाई और बढ़ती कीमतों से आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा असर।
  3. पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, सीबीएसई विवाद और बेरोजगारी।
  1. अर्थव्यवस्था और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति।

आसान नहीं इंडिया ब्लॉक के आगे का रास्ता

1-चुनावी तालमेल की चुनौती : कई राज्यों में गठबंधन के सहयोगी दल एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं। राज्यवार समीकरण साधना आसान नहीं होगा। सीपीएम केरल को लेकर नाराजगी जता चुकी है। बंगाल भी इसका दूसरा उदाहरण है।

2-साझा नेतृत्व का सवाल: गठबंधन के पास अब तक कोई औपचारिक संयोजक या सर्वमान्य चेहरा नहीं है, जिससे निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती है।

3-राष्ट्रीय बनाम क्षेत्रीय प्राथमिकताएं: क्षेत्रीय दलों के अपने राज्य आधारित मुद्दे हैं, जबकि कांग्रेस राष्ट्रीय एजेंडे पर जोर देती है। दोनों के बीच संतुलन बनाना चुनौती है।

4-एकजुटता का संदेश बनाए रखना: लोकसभा चुनाव के बाद कई दल अपने-अपने राज्यों की राजनीति में व्यस्त रहे हैं। ऐसे में साझा राजनीतिक संदेश बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।

5- भाजपा के नैरेटिव का जवाब: विपक्ष को केवल सरकार विरोध तक सीमित रहने के बजाय जनता के सामने वैकल्पिक राजनीतिक और आर्थिक एजेंडा भी पेश करना होगा।

    Published on:
    08 Jun 2026 10:53 am