
Narendra Modi: वडोदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को लेकर कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘नाराज फूफा’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने युवाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से गंभीर चर्चा की मांग की।
रागिनी नायक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद नकारात्मक टिप्पणियां करने के बाद दूसरों से सकारात्मकता की उम्मीद करते हैं, जो उन्हें हास्यास्पद लगता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए भाषा का चयन नहीं किया जा रहा है। ‘दिमागी नक्सल’, ‘नाराज फूफा’, ‘अर्बन नक्सल’ और ‘आंदोलनजीवी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी वास्तविक समस्याओं पर चर्चा होनी चाहिए।
एसआरसीसी में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए नायक ने कहा कि वहां छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर घोषणाएं होनी चाहिए थीं। उन्होंने दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए भवन हादसे का जिक्र करते हुए छात्र सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से पार्टी के नए कार्यालयों का जिक्र किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में पार्टी कार्यालय बनाए गए हैं तो देश में कितने नए छात्रावास, कॉलेज और अस्पताल बनाए गए, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों, रोजगार और महंगाई से जुड़े सवालों पर गंभीरता से बात होनी चाहिए। केवल हंसी-मजाक और राजनीतिक टिप्पणियों से देश की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
नायक ने 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के आंकड़े का उल्लेख करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक ओर आर्थिक विकास के आंकड़ों की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर गरीबी और बच्चों की स्थिति से जुड़े वीडियो सामने आते हैं। ऐसे माहौल में सरकार की उपलब्धियों के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर चुनावी वादों को लेकर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को जनता से किए गए वादों और मौजूदा समस्याओं पर जवाब देना चाहिए। अखिलेश यादव की पार्टी के लाल रंग से नीले रंग की ओर बदलाव को लेकर भाजपा की टिप्पणी पर भी रागिनी नायक ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को दूसरों के कपड़ों और रंगों पर टिप्पणी करने से पहले अपने राजनीतिक रुख पर जवाब देना चाहिए।
नायक ने प्रधानमंत्री मोदी के अलग-अलग चुनावी मुद्दों पर दिए गए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव के समय जाति, वर्ग और सामाजिक पहचान से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है। राहुल गांधी की ओर से जातिगत जनगणना की मांग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब जातिगत जनगणना की बात होती है तो सरकार की ओर से अलग-अलग वर्गों को अलग तरीके से परिभाषित किया जाता है। उन्होंने कहा कि रंगों पर टिप्पणी करने के बजाय सरकार को जनता के वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।