
सांसद सौगत रॉय और बाबा बागेश्वर। फोटो- आईएएनएस
Saugata Roy: नवरात्रि के दौरान मांसाहार नहीं करने संबंधी बाबा बागेश्वर के बयान समेत कई मुद्दों पर तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि बाबा बागेश्वर कहां से आए हैं और वे कौन हैं। उन्हें बंगालियों के खान-पान पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। सौगत रॉय ने कहा कि बंगालियों की बात करें तो स्वामी विवेकानंद खुद मांसाहारी थे। विवेकानंद से बड़ा शायद ही कोई बंगाली संत हुआ हो। इसलिए मैं बाबा बागेश्वर की टिप्पणियों की निंदा करता हूं।
चुनाव चिह्न को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। चुनाव आयोग ने अभी तक कोई चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किया है। मुझे विश्वास है कि यह मुद्दा जल्द सुलझ जाएगा। कालीघाट मंदिर को लेकर सौगत रॉय ने कहा कि मंदिर के अध्यक्ष जिला जज हैं। इस बारे में उन्हें सिद्धांत और व्यवस्था तय करनी चाहिए। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर सौगत रॉय ने कहा कि मैं उच्च न्यायालय की राय की सराहना करता हूं। राज्य सरकार की ओर से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ रोज प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। यह अन्याय है। इस मामले में उच्च न्यायालय की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए जाने से मैं खुश हूं।
दुर्गा पूजा को लेकर मुख्यमंत्री की बैठक पर सौगत रॉय ने कहा कि ममता बनर्जी हर साल ऐसी बैठक करती रही हैं। इसलिए इसमें कुछ भी नया नहीं है। मुख्यमंत्री ने पूजा समितियों को दिए जाने वाले अनुदान में बदलाव का फैसला किया है। छोटी पूजा समितियों को एक लाख रुपए दिए जाएंगे, जबकि बड़ी पूजा समितियों को कोई अनुदान नहीं दिया जाएगा। बंगाली लोग इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे। सौगत रॉय ने कहा कि ममता बनर्जी की भले ही निंदा करें, लेकिन वे भी ममता के रास्ते पर चले हैं। डीजे और शराब की दुकानों को बंद करने के फैसले का मैं समर्थन करता हूं।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने धर्मगुरु धीरेंद्र शास्त्री की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान पूजा पंडालों में मांसाहारी भोजन से बचने की बात कही थी। समिक भट्टाचार्य ने कहा था कि बाहर से आने वाला कोई धार्मिक व्यक्ति बंगाल के लोगों के लिए यह तय नहीं कर सकता कि उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या पहनना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे अपने तरीके से जीने दीजिए। बंगाली वही खाएंगे, जो वे खाते आए हैं। क्या बंगाली मछली और मांस नहीं खा सकते? स्वामी विवेकानंद ने भी यह बात कही है। उनसे ऊपर कौन है? उन्होंने कहा था कि बंगाल में मां काली को भोग के रूप में बकरे का मांस चढ़ाने की परंपरा भी रही है।
Updated on:
08 Sept 2026 02:54 pm
Published on:
08 Sept 2026 02:47 pm
