
S Jaishankar: भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को पड़ोसी देश को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। भारत शांति का समर्थक जरूर है, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर तरह की कड़ी कार्रवाई करने को पूरी तरह तैयार है।
NDTV डिफेंस कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत कभी युद्ध या किसी दूसरे देश की जमीन पर कब्जे की नियत नहीं रखता। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में शांति का पैरोकार है, लेकिन शांति और कायरता के बीच का अंतर सभी को समझना होगा। अगर कोई देश आतंकवाद को पनाह देता है, तो उससे बातचीत के सारे रास्ते अपने आप बंद हो जाते हैं।
राजनाथ सिंह ने बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए दोहराया कि आतंकवाद किसी भी देश के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता। पाकिस्तान अगर अपनी सरजमीं से भारत विरोधी नीतियां चलाना जारी रखता है, तो भारत उसका मुंहतोड़ जवाब देगा।
उधर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयानों का जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने करारा हमला बोला। जयशंकर ने साफ किया कि आतंकवाद को अंजाम देने वाले देश खुद को निर्दोष साबित नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा करने का पूरा अधिकार है और इस अधिकार का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर बिना किसी हिचकिचाहट के किया जाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UNGA में कश्मीर, मई 2025 के सैन्य तनाव और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाकर वैश्विक ध्यान खींचने की कोशिश की थी। उन्होंने अमेरिकी हस्तक्षेप की बात भी कही थी। भारत ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत सरकार का कहना है कि मई 2025 का संघर्षविराम (जो पहलगाम हमले के बाद भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत की गई कार्रवाई का परिणाम था) दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधे संवाद से हुआ था, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से। भारत ने स्पष्ट किया है कि कश्मीर पर किसी भी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। भारत का रुख स्पष्ट है कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देश के साथ जल संधि या सामान्य रिश्तों पर पुनर्विचार स्वाभाविक है।