
Mallikarjun Kharge Rajya Sabha speech: लोकसभा से पारित होने के बाद 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' को चर्चा और पारित कराने के लिए राज्यसभा में पेश किया गया। इस दौरान उच्च सदन में उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नीटपेपर लीक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। खरगे ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़े किए।
बता दें कि जब राज्यसभा में चर्चा चल रही थी तब मल्लिकार्जुन खरगे ने 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। खरगे ने सदन में कहा कि 20 जुलाई को हजारों की संख्या में छात्र शांतिपूर्ण ढंग से संसद की तरफ मार्च निकाल रहे थे। वे सरकार से सिर्फ बातचीत करना चाहते थे, लेकिन संवाद के बदले उन्हें लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट गन, करंट वाले बैरिकेड्स और बंद मेट्रो स्टेशनों का सामना करना पड़ा। सरकार की इस दमनकारी नीति से देश का नागरिक और छात्र वर्ग बेहद आक्रोशित है।'
इतना ही नहीं खरगे ने आगे यह दावा कि इस पुलिसिया कार्रवाई में 100 से अधिक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से कई आईसीयू में भर्ती हैं और कई बच्चों की आंखों में पैलेट गन के छर्रे लगे हैं। खरगे ने कहा कि गांव-देहात से आए बच्चों पर इस तरह का बल प्रयोग बेहद शर्मनाक है।
गृह मंत्री अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि राजधानी में इतनी बड़ी घटना हो गई, लेकिन गृह मंत्री का कोई बयान सामने नहीं आया। खरगे ने कहा कि आप बंद कमरे में बैठकर बहुत दिनों तक छुप नहीं सकते। एक दिन जनता आपको बाहर खींचकर लाएगी और जवाब देने पर मजबूर करेगी। अगर आप खुलकर बोलना नहीं सीखेंगे, तो देश के छात्र और युवा आने वाले दिनों में सरकार को करारा सबक सिखाएंगे।
खरगे के तल्ख तेवरों और तीखी टिप्पणियों पर BJP के अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कड़ी आपत्ति जताई। नड्डा ने खरगे के बयानों को असंसदीय करार देते हुए सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। जेपी नड्डा ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की बात को शांति और धैर्य से सुनना हमारी जिम्मेदारी है और हम सुन भी रहे हैं। लेकिन नेता प्रतिपक्ष से मेरा निवेदन है कि वे तर्कसंगत बात रखें। भावावेश में आकर ऐसे असंसदीय और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग न करें जो उच्च सदन की गरिमा के खिलाफ हों।