Khamenei Death: ईरानी सुप्रीम कमांडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद भारत में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इसी बीच ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या की है।
Khamenei Death: ईरानी सुप्रीम कमांडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद भारत में अनेक हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। शिया धर्मगुरुओं के लगातार बयान सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में दिल्ली से ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की है। उन्होंने कहा कि इस मामले को International Court of Justice में ले जाया जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। रशीदी ने अमेरिका पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपनी ताकत के दम पर जब चाहता है, जैसा चाहता है, वैसा करता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग जुटे और इज़राइल व अमेरिका के खिलाफ नारेबाज़ी करते हुए विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े पहनकर शोक व्यक्त किया, जबकि महिलाओं और पुरुषों के हाथों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें थीं, जिन्हें वे लहराते नजर आए। मौके पर काले झंडे फहराए गए और ‘इज़राइल मुर्दाबाद’ के नारे गूंजते रहे। भावनात्मक माहौल के बीच कई महिलाएं रोती-बिलखती दिखीं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनके नेता की मौत एक सुनियोजित साजिश का नतीजा है, जिसके पीछे अंतरराष्ट्रीय ताकतों की भूमिका है, इसी कारण लोगों में गहरा आक्रोश और शोक देखने को मिला।
दिल्ली के ईरान कल्चरल सेंटर पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त करते नजर आए, जबकि राजधानी समेत अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी दर्ज किए गए। इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली स्थित शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद अली मोहसिन तकवी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुनिया एक बेहद खतरनाक मोड़ पर खड़ी है, जहां ताकत के बल पर सरकारों और नेतृत्व को खत्म करने की सोच वैश्विक अस्थिरता को बढ़ावा दे रही है। पीटीआई से बातचीत में उन्होंने चिंता जताई कि यदि किसी देश के शीर्ष नेतृत्व को बमबारी के जरिए निशाना बनाए जाने को सामान्य मान लिया गया, तो यह पूरी दुनिया के लिए गंभीर और भयावह संदेश होगा। उनका कहना था कि आज एक देश और कल दूसरा। इस तरह की मानसिकता अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करती है और शांति के दावों पर गहरे सवाल खड़े करती है।