नई दिल्ली

सना का खौफनाक मजाक सच हो गया, दोस्तों से कहा था- बिल्डिंग गिर जाएगी, फिर आंखों के सामने ढह गई

Saty Niketan Accident: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने से पहले 18 साल का सना कमरे से निकल गया। नल में पानी न आने की वजह से उसकी जान बच गई, जबकि उसके दो दोस्त अब भी AIIMS में भर्ती हैं।
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दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत हादसे के बाद का खौफनाक मंजर (फोटो सोर्स- IANS)

Satya Niketan Building Collapse:दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत के अचानक भरभराकर गिरने से छह लोगों की मौत हो गई और कई लोग मलबे में फंस गए। इस हादसे के बीच 18 साल के सना वरश की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। हादसे से सिर्फ 15 मिनट पहले वह अपने कमरे से बाहर निकला था। वजह थी बेहद मामूली, कमरे के नल में पानी नहीं आ रहा था। लेकिन यही छोटा सा फैसला उसकी जिंदगी बचा गया। सना पहले भी दोस्तों से मजाक में कहता था, ‘बिल्डिंग गिर जाएगी क्या?’ रविवार को उसका यही डर खौफनाक हकीकत में बदल गया। वहीं उसके दो दोस्त अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

नल में पानी नहीं आया और टल गई मौत

पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार से दिल्ली में पढ़ाई का सपना लेकर आया सना मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष का छात्र है। वह इसी जर्जर इमारत की तीसरी मंजिल पर पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में रहता था। रविवार दोपहर करीब 12 बजे जब उसकी नींद खुली, तो कमरे के नल में पानी नहीं आ रहा था। फ्रेश होने के लिए वह पास ही रहने वाले अपने एक दोस्त के रूम पर चला गया। उसके बाहर निकलते ही ठीक 15 मिनट बाद पूरी इमारत भर-भराकर गिर गई। पानी न आना उसके लिए जीवनदान साबित हुआ।

हंसी-मजाक का खौफनाक सच में बदलना

सना ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि रविवार सुबह से ही इमारत के बेसमेंट से अजीब गड़गड़ाहट और चरमराने की आवाजें आ रही थीं। वह अक्सर अपने साथियों से मजाक में कह देता था, ‘बिल्डिंग गिर जाएगी क्या?’ उसे क्या पता था कि उसका यह अनजाना डर इतनी जल्दी भयानक हकीकत बन जाएगा। इमारत की सीढ़ियां संकरी, जर्जर और सीलन भरी थीं, जिसे देखकर उसे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती थी।

महंगे किराए में जर्जर व्यवस्था

सत्य निकेतन की इस संकरी-सी गली में छात्रों से मोटा किराया वसूला जा रहा था। सना ने बताया कि बेहद छोटे से कमरे का किराया 14,000 रुपये प्रति महीना था (बिजली का बिल अलग)। कमरों की हाल ही में मरम्मत जरूर की गई थी, लेकिन पूरी इमारत अंदर से बेहद कमजोर हो चुकी थी। एक साधारण परिवार से आने वाले सना के पिता इलेक्ट्रीशियन हैं, जिनके लिए यह खर्च उठाना पहले से ही कठिन था।

मलबे में दबा भविष्य, दोस्तों की सलामती की दुआ

इस हादसे में सना का सब कुछ खत्म हो गया है लैपटॉप, कपड़े, 12वीं का ओरिजिनल सर्टिफिकेट, CUET स्कोरकार्ड, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज अब मलबे के नीचे दबे हैं। लेकिन इस वक्त उसे अपने सामान की नहीं, बल्कि एम्स (AIIMS) के आईसीयू में भर्ती अपने दो दोस्तों, नीतीश और नीरज की फिक्र है। फुटपाथ पर बैठा सना लगातार अपने साथियों के ठीक होने की प्रार्थना कर रहा है।

Updated on:
07 Sept 2026 10:29 am
Published on:
07 Sept 2026 10:29 am