
Sonam Wangchuk ends fast: करीब 26 दिनों तक भूख हड़ताल करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। उन्होंने यह फैसला तब लिया, जब केंद्र सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने भरोसा दिया कि देश की परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता के मुद्दे पर संसद में गंभीर चर्चा होगी।
अनशन खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने बताया कि उनका आंदोलन किसी सरकार या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य के लिए था। उन्होंने कहा कि सरकार और सभी दलों के सांसदों से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया। अब उन्हें उम्मीद है कि संसद में इस मुद्दे पर सिर्फ चर्चा ही नहीं होगी, बल्कि ठोस फैसले भी लिए जाएंगे।
दरअसल, हाल के महीनों में नीट परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सामने आई गड़बड़ियों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी। कई छात्रों का कहना था कि उनकी मेहनत पर पानी फिर गया और पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए। इन्हीं मुद्दों को लेकर सोनम वांगचुक ने आंदोलन शुरू किया था।
उनका कहना है कि केवल परीक्षा कराना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय हो और छात्रों को समय पर न्याय मिल सके। उनका मानना है कि ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य किसी की गलती की वजह से खराब नहीं होना चाहिए।
सरकार की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया है कि नीट पेपर लीक मामले के बाद जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उन्हें उचित सहायता और मुआवजा देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, परीक्षा सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने की बात भी कही गई है।
अब इस पूरे मामले पर देशभर के लाखों छात्रों और उनके परिवारों की नजर टिकी है। सभी को उम्मीद है कि इस आंदोलन का असर सिर्फ सरकारी आश्वासनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद में होने वाली चर्चा के बाद परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।