
Sonam Wangchuk Jantar Mantar protest: लद्दाख के जाने-माने शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देश की जनता से एक भावुक और सशक्त अपील की है। उन्होंने कहा कि वह कोई 'आधुनिक गांधी' या कोई बड़े हीरो नहीं हैं, बल्कि सिर्फ एक आम नागरिक हैं। वांगचुक ने लोगों से आग्रह किया कि वे आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए किसी और की राह देखना बंद करें और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में खुद आगे आएं।
परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का धरना शनिवार को 22वें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन में 28 जून को शामिल हुए सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का आज 14वां दिन है। संगठन द्वारा जारी हेल्थ अपडेट के मुताबिक, भूख हड़ताल के कारण उनका वजन 7.5 किलो कम हो चुका है और उनका ब्लड प्रेशर 106/74 mm Hg रिकॉर्ड किया गया है।
शुक्रवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में सोनम वांगचुक ने अपनी सेहत की जानकारी देते हुए आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि आज मेरे उपवास का 13वां दिन है, मैं कल जितना ऊर्जावान महसूस नहीं कर रहा हूं। थोड़ी थकान है। ऐसा होता है कि कुछ दिन अच्छे होते हैं और कुछ दिन नहीं।
सोशल मीडिया पर मिल रहे भारी जनसमर्थन के लिए लोगों का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि दो तरह की टिप्पणियों से उन्हें थोड़ी निराशा होती है। उनका कहना है कि कई लोग मुझे 21वीं सदी का गांधी या आधुनिक गांधी कहते हैं। कुछ लोग मुझे हीरो बुलाते हैं। ये टिप्पणियां मुझे असहज करती हैं। मैं न तो गांधी हूं और न ही कोई हीरो। मैं सिर्फ एक साधारण नागरिक हूं जिसने अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की कोशिश की है। कृपया किसी और में हीरो मत ढूंढिए। अपने जीवन के हीरो खुद बनिए और नागरिक के तौर पर अपने कर्तव्यों को पूरा कीजिए।
परीक्षाओं में कथित धांधली के कारण निराश होकर छात्रों द्वारा की जा रही खुदकुशी का जिक्र करते हुए वांगचुक ने देशवासियों से मूकदर्शक न बने रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर उन छात्रों में से कोई आपकी बहन या बेटी होती, तो आप आज हमारे साथ खड़े होते। लेकिन उस स्थिति का इंतजार मत कीजिए। अगर आप रोज यहां नहीं आ सकते, तो कम से कम एक दिन के लिए जंतर-मंतर जरूर आएं। जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, वे जहां हैं वहीं उपवास रखें और अपना संदेश साझा करें।'
सोनम वांगचुक ने मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण 'संसद मार्च' में लोगों से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील दोहराई, ताकि सांसद इस गंभीर मुद्दे को सदन में उठा सकें। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि आपको हमारी तरह 24 दिनों तक भूखे रहने की जरूरत नहीं है। आप अपना खाना खाकर आइए, लेकिन 20 जुलाई को एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराइए।'
इससे पहले वांगचुक ने स्पष्ट किया था कि शुरुआती दिनों के बाद अब उनकी भूख 'स्थिर' हो गई है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन्हें धरना स्थल से जबरन हटाने की कोशिश की गई, तो यह उनके शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा। उन्होंने कहा कि मैं यहां अपनी मर्जी से हूं और मेरी जान को कोई खतरा नहीं है।