
Sonam Wangchuk Delhi HC PIL: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के लंबे अनशन को लेकर अब मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जंतर-मंतर पर जारी उनकी भूख हड़ताल को खत्म कराने और उनकी सेहत को देखते हुए तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है।
याचिका में अदालत से अपील की गई है कि केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिए जाएं कि वांगचुक को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए। साथ ही, अगर उनकी जान बचाने के लिए जरूरी हो तो उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में पोषण दिया जाए। याचिका अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी की ओर से दायर की गई है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता नहीं दी गई, तो अगले 2 दिनों में उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर पर गंभीर असर पड़ा है और उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम तक कम हो गया है।
याचिका में दावा किया गया है कि सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शन के दौरान वह शिक्षा व्यवस्था में कथित खामियों और नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि लगातार भूखे रहने के कारण वांगचुक की सेहत तेजी से खराब हो रही है। याचिका में चिंता जताई गई है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। इसी आधार पर अदालत से उनकी मेडिकल जांच और जरूरी इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की गई है।
याचिका में जीवन के अधिकार यानी संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति की जान बचाना सरकार की जिम्मेदारी है। इसमें यह भी कहा गया है कि लंबे समय तक चलने वाले अनशन की स्थिति में प्रशासन को स्वास्थ्य संबंधी कदम उठाने चाहिए।
वहीं, सोनम वांगचुक से जुड़े प्रदर्शन का आयोजन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मंच से किया जा रहा है। वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोगों की आवाज सुनने की अपील की है और सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर साथ आने को कहा है।
प्रदर्शन के दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह पुलिस अधिकारियों से वांगचुक की स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर मदद की अपील करते नजर आ रहे हैं। इस बीच, कई विपक्षी नेताओं ने भी वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की है। कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने को कहा है। अब सभी की नजर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर है, जहां इस मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।