Telegram Ban India: NEET (UG) 2026 पुनर्परीक्षा से पहले केंद्र सरकार की कार्रवाई के बाद Telegram को भारत में Google Play Store से हटा दिया गया है। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी अफवाहें, फर्जी पेपर लीक दावे और धोखाधड़ी फैलाने के लिए किया जा रहा था। हालांकि, Telegram अभी भी Apple App Store पर उपलब्ध है।

Telegram Removed From Google Play Store:केंद्र सरकार द्वारा NEET (UG) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद यह ऐप भारत में Google Play Store से हटा दिया गया है। इसके चलते नए एंड्रॉयड यूजर्स फिलहाल Google के आधिकारिक ऐप स्टोर से Telegram डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, यह ऐप अभी भी Apple App Store पर उपलब्ध है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर 22 जून तक Telegram की पहुंच सीमित करने का फैसला लिया था। सरकार का कहना है कि यह कदम NEET पुनर्परीक्षा से पहले परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी, फर्जी सूचनाओं और नकल के नेटवर्क पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है।
NTA के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत यह कार्रवाई की गई है। एजेंसी का दावा है कि Telegram के कई चैनल और ग्रुप कथित तौर पर पेपर लीक से जुड़े भ्रामक दावे फैलाने और छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर ठगने में इस्तेमाल किए जा रहे थे। इसके अलावा Telegram को भारत में 30 जून तक अपने मैसेज-एडिटिंग फीचर को भी बंद करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस फीचर का दुरुपयोग कर पुराने संदेशों और फाइलों में बदलाव करके पेपर लीक के फर्जी सबूत तैयार किए जाते थे। NTA ने दोहराया है कि NEET परीक्षा का कोई पेपर लीक नहीं हुआ था और समस्या से निपटने के लिए पहले विशिष्ट चैनलों, ग्रुपों और बॉट्स को हटाने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन बड़े पैमाने पर फैल रहे नेटवर्क को देखते हुए कड़े कदम उठाने पड़े। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राज्य पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी Telegram के जरिए चलाए जा रहे कथित परीक्षा घोटालों की जांच में जुटी हुई हैं।
सरकार के इस फैसले पर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। एक्स यूजर @aryakthinks ने प्रतिबंध को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि टेलीग्राम पर रोक लगाना मूल समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, यदि परीक्षा का पेपर लीक हो रहा है तो कार्रवाई उन लोगों और नेटवर्क के खिलाफ होनी चाहिए जो सबसे पहले इसे बाहर लाते हैं, न कि केवल उस प्लेटफॉर्म पर जहां जानकारी साझा की जाती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी अपराध के लिए पूरे माध्यम को बंद करना वैसा ही है जैसे किसी एक व्यक्ति की गलती पर पूरा हाईवे बंद कर दिया जाए। यूजर ने यह भी तर्क दिया कि यदि यही सोच अपनाई जाए तो व्हाट्सएप, ईमेल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी प्रतिबंध लगाने की नौबत आ सकती है। उनके अनुसार यह कदम समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है।