
Delhi NCR property news: माता-पिता को एक परमानेंट घर देना चाहता था, ताकि बुढ़ापे में उन्हें बार-बार किराए का मकान न बदलना पड़े। पर क्या पता था कि नामी बिल्डर भी इस तरह फंसा देगा। यह दर्द सिर्फ किसी एक शख्स का नहीं है, बल्कि नोएडा के सेक्टर 150 में स्थित 'गोदरेज नेस्ट' प्रोजेक्ट में आशियाने का सपना देखने वाले सैकड़ों परिवारों की यही कहानी है।
मुंबई में कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी ने अपने माता-पिता के लिए साल 2022 में करीब 1.34 करोड़ रुपए में 2BHK फ्लैट बुक किया था। इसके लिए उन्होंने अपनी जमा-पूंजी और बैंक लोन का सहारा लिया। बिल्डर ने वादा किया था कि सितंबर 2024 तक फ्लैट मिल जाएगा। तारीख बीत गई, लेकिन काम अधूरा रहा। हद तो तब हो गई जब बैंक ने पजेशन की पक्की तारीख न मिलने पर आगे का लोन देने से मना कर दिया। मजबूरन, इस शख्स को अपने 15 साल के बेटे की पढ़ाई के लिए रखी 7 लाख रुपए की एफडी (FD) तोड़नी पड़ी, ताकि आखिरी किस्त चुकाई जा सके।
पीड़ित ने बताया कि उन्होंने नामी ब्रांड (Godrej) का चुनाव इसलिए किया था ताकि किसी धोखाधड़ी से बचा जा सके। लेकिन लंबी लड़ाई के बाद जब जून के आखिर में दो टावरों में पजेशन शुरू भी हुआ, तो नई मुसीबतें सामने आ गईं। बिल्डर ने 2 जुलाई को मेल भेजकर कहा कि 1 जुलाई से ही मेंटेनेंस चार्ज लागू हो गया है और 1.30 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान करना होगा। अब वह परेशान हैं कि जो चार्ज पहले तय नहीं था, वो क्यों मांगा जा रहा है।
जिन्हें फ्लैट की चाबी मिल गई है, उनकी मुसीबतें भी कम नहीं हैं। एक महिला खरीदार ने बताया कि कंस्ट्रक्शन क्वालिटी इतनी घटिया है कि उन्हें पूरे फ्लैट का काम दोबारा कराना पड़ रहा है। किचन और बाथरूम की टाइल्स उखड़ रही हैं और पजेशन मिलने के तीसरे दिन से ही दीवारों से पानी रिसने लगा है। उन्होंने कहा कि 4-5 साल पहले हमने लग्जरी के नाम पर 30% ज्यादा कीमत दी थी, लेकिन आज न क्वालिटी मिली और न ही वादे के मुताबिक गैस पाइपलाइन और मीटर।
वहीं जयपुर की एक 62 वर्षीय रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल की कहानी और भी भावुक करने वाली है। उन्होंने नोएडा में रह रहे अपने बेटे-बहू के पास रहने के लिए जयपुर का अपना पुश्तैनी मकान 1.75 करोड़ रुपए में बेच दिया और यहां रीसेल में फ्लैट लिया। बिल्डर ने जल्दी पजेशन का वादा किया था, लेकिन आज वह नोएडा के सेक्टर 128 में किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने रोते हुए कहा कि जिस घर में मैं 6 साल की उम्र से रह रही थी, उसे बेच दिया। आज मैं 62 साल की हूं और मेरे पास अपना कोई घर नहीं है।
इस पूरे मामले पर फिलहाल बिल्डर की तरफ से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है, लेकिन इसने दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदारों की सुरक्षा और बड़े ब्रांड्स की साख पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।