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डोंबिवली में डॉक्टरों से मारपीट पर फूटा आदित्य ठाकरे का गुस्सा, बोले- आरोपी पार्षद को गिरफ्तार कर पूरे शहर में घुमाया जाए

KDMC Hospital Dombivli Doctor assault case: कल्याण-डोंबिवली में सरकारी डॉक्टरों से कथित मारपीट के मामले पर शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने पार्षद रमेश म्हात्रे की गिरफ्तारी, अयोग्यता और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।
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मुंबई

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Anand Shekhar

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Shaitan Prajapat

Jul 08, 2026

Aditya Thackeray

आदित्य ठाकरे (फोटो- आईएएनएस)

डोंबिवली डॉक्टर से मारपीट का मामला: महाराष्ट्र के डोंबिवली में सरकारी वकील और मेडिकल स्टाफ के साथ-साथ सागर केस में डेमोक्रेटिक पार्टी (यूबीटी) के नेता और विधायक आदित्य ठाकुर ने मांग की है कि बंजीवाल डॉक्टर को सिर्फ तुरंत अपना पद से हटा दिया जाए, बल्कि उन्हें गिरफ्तार करके डोंबिवली और कल्याण की वर्कशॉप पर सामने आ जाएं। विश्वासियों की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की ओर से आलोचना की गई, जिसके बाद ठाकरे ने मुख्यमंत्री से इस मामले में प्रवेश की मांग की है। ठाकरे ने कहा कि कोई भी इस तरह से हाथ नहीं उठा सकता। महिला डॉक्टर हो, पुरुष डॉक्टर हो या नर्स, इस तरह का बुरा प्रभाव बिल्कुल भी नहीं देखा जाएगा।

जानिए क्यों हुआ विवाद

आपको बता दें कि मुंबई के एक सरकारी अस्पताल में एक गर्भवती महिला की डिलीवरी से पहले जांच में पता चला कि नवजात बच्चे को NICU की जरूरत पड़ सकती है। अस्पताल ने परिवार को बताया कि उनके यहां सभी NICU बेड भरे हुए हैं, इसलिए बेहतर होगा कि वे कहीं और शिफ्ट हो जाएं। परिवार ने इस बात को बर्दाश्त नहीं किया। महिला के पति ने शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे को फोन कर बुला लिया। म्हात्रे अपने साथ कुछ लोगों के साथ अस्पताल पहुंचे और वहां डॉक्टरों व नर्सों पर मारपीट कर दी।

KDMC शास्त्रीनगर अस्पताल में मारपीट के मामले पर ACP सुहास हेमाडे ने कहा कि इस मारपीट के मामले में 4 आरोपी शामिल हैं, जिनमें एक महिला भी है। यह घटना अस्पताल आई एक महिला मरीज के इलाज को लेकर हुए विवाद के कारण हुई। आरोपी मरीज के रिश्तेदारों के साथ आए थे। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर, एक महिला डॉक्टर और एक नर्स के साथ मारपीट की, उनके साथ शारीरिक हिंसा की, अपशब्द कहे और धमकियां दीं। डॉक्टर ने कल मामला दर्ज कराया। IPC की संबंधित धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं। सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सवाल उठा दिया है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा कहां है? सालों तक मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टर, जो दिन-रात ड्यूटी पर रहते हैं, आखिर कब तक एक दसवीं पास पार्षद, वोट बैंक की राजनीति करने वाले नेता या गुस्साए रिश्तेदारों के गुस्से का शिकार बनते रहेंगे? हर मौत या जटिल केस में रिश्तेदार सोचते हैं कि डॉक्टर ने पूरी कोशिश नहीं की। जबकि हकीकत यह है कि डॉक्टर भी इंसान हैं। उनके पास सीमित संसाधन होते हैं।

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