
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के मानगढ़ धाम को प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने योग्य नहीं माना गया है। सरकार ने यह भी कहा कि फिलहाल इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
सोमवार को लोकसभा में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के सवाल पर लिखित जवाब दिया। इसमें बताया गया कि मानगढ़ धाम राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किए जाने के मानकों पर खरा नहीं उतरता और इस संबंध में सरकार के पास कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है।
केंद्र के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए बेनीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार जनजातीय समाज के सबसे बड़े बलिदान स्थलों में से एक की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सहित पूरे देश के आदिवासी समाज की अस्मिता, बलिदान और स्वतंत्रता चेतना का प्रतीक है।
बेनीवाल ने कहा कि इतिहास का मूल्यांकन केवल इमारतों और पुरातात्विक संरचनाओं के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार मानगढ़ की पहाड़ियों पर अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान हजारों भील-आदिवासी शहीद हुए थे, इसलिए इस स्थल को राष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम के लिए विशेष राष्ट्रीय स्मृति एवं जनजातीय गौरव संरक्षण योजना बनाने, इसे राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने और राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग दोहराई। साथ ही कहा कि मानगढ़ के शहीदों का सम्मान पूरे राष्ट्र का दायित्व है और इस मुद्दे पर उनका संघर्ष जारी रहेगा।